रेतीली जमीन पर उगाया सोना ! 70 एकड़ में आम का बगीचा, विदेशी तकनीक से किसान कमा रहा लाखों
जिस रेतीली जमीन को कभी खेती के लिए बेकार माना जाता था, आज वही जमीन लाखों रुपए की कमाई का जरिया बन गई है। नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा तहसील स्थित छेना कछार गांव में एक किसान ने अपनी मेहनत और आधुनिक तकनीक के दम पर रेतीली भूमि को आम के विशाल बगीचे में बदल दिया है। विदेशी तकनीक से तैयार इस बाग की चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है। मूल रूप से छिंदवाड़ा निवासी किसान विजय पाल सिंह पटेल ने परंपरागत खेती से हटकर कुछ नया करने का फैसला लिया। उन्होंने नदी किनारे की करीब 70 एकड़ रेतीली जमीन पर आम का बगीचा विकसित किया। इसके लिए उन्होंने इजराइल की अल्ट्रा हाई डेंसिटी तकनीक अपनाई, जो कम जगह में अधिक पौधे लगाने और ज्यादा उत्पादन लेने के लिए जानी जाती है।
जहां सामान्य खेती में एक एकड़ में 65 से 100 आम के पौधे लगाए जाते हैं, वहीं इस तकनीक के जरिए एक एकड़ में 400 से लेकर 1400 तक पौधे लगाए जा सकते हैं। आज उनके बगीचे में करीब 54 हजार आम के पौधे हैं, जिनमें केसर, लंगड़ा और अन्य किस्मों के पौधे शामिल हैं। किसान विजय पाल बताते हैं कि इस तरह की बागवानी में शुरुआती तीन वर्षों तक उत्पादन नहीं मिलता और लागत भी अधिक आती है। यही वजह है कि कई किसान इसे अपनाने से हिचकते हैं। लेकिन एक बार बगीचा तैयार हो जाए तो कमाई के नए रास्ते खुल जाते हैं। पिछले वर्ष उन्हें एक एकड़ से करीब पांच टन आम का उत्पादन मिला था। हालांकि इस साल ओलावृष्टि और तेज आंधी के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ, फिर भी बगीचे से अच्छी आय की उम्मीद है।
बगीचे में बैगिंग तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है। इसमें फलों को विशेष बैग से ढक दिया जाता है, जिससे कीटों से सुरक्षा मिलती है और आम का रंग, चमक तथा गुणवत्ता बेहतर होती है। यही वजह है कि उनके केसर आम 172 रुपए प्रति किलो तक बिके, जबकि लंगड़ा आम को भी 80 से 120 रुपए प्रति किलो का भाव मिला। आज उनके आम इंदौर, जयपुर और गुजरात जैसे बड़े बाजारों तक पहुंच रहे हैं। विजय पाल का मानना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक अपनाएं तो खेती को घाटे का नहीं, बल्कि फायदे का सौदा बनाया जा सकता है। रेतीली जमीन पर तैयार हुआ यह आम का बगीचा साबित करता है कि आधुनिक तकनीक, मेहनत और दूरदृष्टि से खेती में भी सफलता की नई कहानियां लिखी जा सकती हैं।