Sagar- कहीं स्कूल भवन ही नहीं, कहीं बच्चे ही नहीं आ रहे स्कूल, कई स्कूलों में ताले डले मिले !
एक तरफ तो सरकार सरकारी स्कूलों को संवारने और सुविधाओं का विस्तार करने की बात करती है लेकिन हकीकत इससे कहीं उलट नज़र आती है। कुछ इसी तरह का नज़ारा सागर जिले के बीना क्षेत्र में भी देखने को मिला। जहां नए शिक्षण सत्र की शुरुआत तो हो गयी है लेकिन बीना ब्लॉक में कहीं स्कूलों में ताले डले नज़र आये तो कहीं बच्चे ही स्कूलों में नहीं पहुंचे। वहीं चिकनोटा और दौलतपुर गांव में भवन जर्जर होने से अन्य जगहों पर स्कूल लगाए जाने थे। लेकिन यहां भी न तो कोई शिक्षक पहुंचा और न ही बच्चे आये।
सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने विभाग भी तमाम तरह की योजनाएं संचालित कर रही है स्कूलों को हाइटेक बनाया जा रहा है। लेकिन बीना ब्लॉक के कई ऐसे स्कूल हैं जहां छात्रों की पढ़ाई के लिए भवनों तक की सुविधा नहीं है। ऐसे में छात्रों से लेकर शिक्षकों तक को परेशानी भुगतनी पड़ रही है। चिकनोटा गांव का प्राथमिक स्कूल बंद मिला। दौलतपुर गांव के सरकारी स्कूल पहुंचे तो जिस जगह पर स्कूल का भवन था, वहां कोई भी मौजूद नहीं था। पूछ्ने पर पता चला कि गांव में एक जगह किराए से स्कूल चलता है। वहां पहुंचने पर जानकारी मिली कि यहां पर पहले दिन न तो बच्चे आए हैं न ही कोई शिक्षक आया।
शिक्षिका काजल शुक्ला फोन पर से बात हुई तो कुछ ही देर में वह गांव आ गई। उन्होंने बताया कि करीब तीन साल पहले बिल्डिंग जर्जर होने की वजह से उसे गिरा दिया गया। उन्होंने बताया कि वह दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। वह पिछले दो सालों से अपने खर्चे पर किराए का कमरा लेकर बच्चों को पढ़ा रहीं हैं। स्कूल में कुल 7 बच्चे दर्ज हैं। इस समस्या को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं।
वहीं रामपुर गांव का स्कूल भी बंद मिला। एकीकृत स्कूल ढुरूआ में दो शिक्षिकाएं मौजूद थीं। जानकारी लेने पर बताया गया कि स्कूल में कुल 52 बच्चे दर्ज हैं लेकिन स्कूल के पहले दिन कोई भी बच्चा नहीं आया था। पूरे दिन बच्चों का इंतजार किया। उन्हें बुलाने उनके घर भी गए बावजूद इसके बच्चे नहीं आये। बीना के खुरई रोड पर स्थित सांदीपनि स्कूल में पहले दिन पहली से बारहवीं में कुल दर्ज 1273 विद्यार्थियों में से महज 25 छात्र ही स्कूल पहुंचे।