Sagar- डॉक्टरों को सिखाए वैज्ञानिक शोध के गुर, चिकित्सा अनुसंधान को नई उड़ान ! IMA और FOGSI की पहल
चिकित्सा विज्ञान लगातार नई खोजों और तकनीकों के साथ आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में डॉक्टरों और चिकित्सा शोधार्थियों को वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़ने के उद्देश्य से सागर में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन यानी आईएमए और फोगसी सागर शाखा ने मिलकर PICSEP कार्यक्रम के तहत यह अभिनव पहल की, जिसका उद्देश्य चिकित्सा क्षेत्र में वैज्ञानिक सोच और अनुसंधान की संस्कृति को बढ़ावा देना है। सागर में आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला में शहर और आसपास के क्षेत्रों के चिकित्सकों, चिकित्सा शिक्षकों, निजी प्रैक्टिशनरों और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अहमदाबाद के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुनील ताम्बवेकर रहे।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल रोगों का उपचार करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि साक्ष्य-आधारित चिकित्सा यानी एविडेंस बेस्ड मेडिसिन को समझना और नई शोधों को व्यवहार में लागू करना भी बेहद जरूरी है। कार्यशाला में प्रतिभागियों को शोध विषय चयन, अध्ययन की रूपरेखा, डेटा विश्लेषण, बायो-स्टैटिस्टिक्स, वैज्ञानिक लेखन, शोध पत्र प्रकाशन और अनुसंधान नैतिकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई।
फोगसी सागर की अध्यक्ष डॉ. ज्योति चौहान ने बताया कि इस कार्यशाला से चिकित्सकों को यह समझने का अवसर मिला कि किसी सामान्य चिकित्सीय समस्या को वैज्ञानिक अध्ययन में बदलकर स्वास्थ्य सेवाओं में कैसे सुधार लाया जा सकता है। वहीं आईएमए अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने कहा कि अनुसंधान केवल ज्ञान बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि मरीजों को बेहतर और प्रमाण-आधारित उपचार उपलब्ध कराने का एक महत्वपूर्ण साधन भी है। उन्होंने स्थानीय स्वास्थ्य समस्याओं पर स्थानीय स्तर पर किए जाने वाले शोधों के महत्व पर भी जोर दिया।
यह कार्यशाला विभिन्न विशेषज्ञताओं के चिकित्सकों के लिए एक साझा मंच बनी, जहां उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और भविष्य की शोध परियोजनाओं पर चर्चा की। आईएमए और फोगसी सागर की यह पहल न केवल चिकित्सा अनुसंधान को नई दिशा देगी, बल्कि युवा डॉक्टरों और शोधार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए प्रेरित भी करेगी।