Sagar- बस दो दिन और इतिहास बन जाएगा ये गांव,पानी में समा जाएंगी यादें, आंखों में विस्थापन का दर्द
मध्यप्रदेश के सागर जिले की बंडा तहसील के सलैया गांव से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को भावुक कर सकती है। उल्धन बांध परियोजना के चलते गांव को खाली करने के लिए प्रशासन ने अंतिम मोहलत दे दी है। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ दो दिन बाद उनका पूरा गांव इतिहास बन जाएगा और वर्षों की यादें पानी में समा जाएंगी। सलैया गांव इन दिनों अनिश्चितता, डर और दर्द के दौर से गुजर रहा है। प्रशासन की ओर से गांव खाली करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। गांव में लगातार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पहुंच रहे हैं और लोगों से जल्द से जल्द अपने घर खाली करने को कह रहे हैं।
ग्रामीणों का दावा है कि उन्हें साफ शब्दों में चेतावनी दी गई है कि दो दिन बाद गांव में कोई नहीं रह सकेगा, क्योंकि बारिश शुरू होते ही उल्धन बांध परियोजना का पानी पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है। गांव की गलियों में आज सन्नाटा पसरा हुआ है। जिन आंगनों में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब भविष्य की चिंता दिखाई दे रही है। छोटे-छोटे बच्चे यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर उनका घर क्यों छिन रहा है और दो दिन बाद वे कहां रहेंगे।
पत्रकारों की टीम से बातचीत के दौरान कई बुजुर्ग भावुक हो उठे। वर्षों से इसी मिट्टी में जीवन बिताने वाले ग्रामीणों की आंखों से आंसू छलक पड़े। माता राम नामक महिला ने बताया कि करीब 50 साल पहले शादी होकर वह इस गांव में आई थीं। मेहनत और संघर्ष से उन्होंने अपना घर बसाया था, लेकिन अब सब कुछ छोड़ने की नौबत आ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें जिस स्थान पर बसाया जा रहा है, वह गांव से लगभग 20 किलोमीटर दूर है और वहां एक केमिकल फैक्ट्री संचालित होती है। उनका कहना है कि ऐसे स्थान पर रहना स्वास्थ्य के लिए खतरा हो सकता है। साथ ही कई ग्रामीणों ने मुआवजे को लेकर भी असंतोष जताया है।
वहीं प्रशासन का कहना है कि विस्थापन की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की गई है। एसडीएम आरती यादव के अनुसार, उल्धन बांध परियोजना से क्षेत्र की सैकड़ों एकड़ भूमि सिंचित होगी और हजारों किसानों को इसका लाभ मिलेगा। लेकिन विकास और विस्थापन के बीच खड़े सलैया के लोगों के मन में आज सिर्फ एक सवाल है—दो दिन बाद उनका घर, उनका गांव और उनका भविष्य आखिर कहां होगा?