सागर- सरकारी हॉस्टल में चौपट व्यवस्थाएं,सफाई के नाम पर खोखले दावे, जहां देखो वहीं अव्यवस्थाएं !
एक तरफ सरकार तमाम तरह के दावे और वादे करती है की छात्र-छात्राओं को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है। लेकिन सागर के एक सरकारी हॉस्टल से जो तस्वीरें सामने आई हैं वह चौंकाने वाली हैं। और हकीकत में इन सब बातों की पोल भी खुलती नज़र आ रही है। यहां जगह-जगह गंदगी पसरी हुई है। चारों तरफ अव्यवस्थाएं हैं। यहां-वहां कचरा फैला हुआ है। तो छात्रों के कमरों में भी साफ-सफाई नहीं है। शौचालयों के हाल ऐसे हैं की एक पल भी रुकना दूभर है। गंदगी का आलम ऐसा की अच्छा खासा इंसान बीमार पड़ जाए। आपको नज़र आने वाला ये नज़ारा सागर के पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए संचालित सरकारी संभागीय बालक पोस्ट मैट्रिक छात्रावास का है। इस तरह की तस्वीरों के बाद कई तरह के सवाल खड़े होना लाजिमी है। की आखिर ये अव्यवस्थाएं क्यों है इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
बता दें की सागर के तिली क्षेत्र में स्थित छात्रावास में हर तरफ अव्यवस्थाओं का आलम है। न तो साफ़-सफाई नज़र आई। न ही पानी की टंकियां बहुत ज्यादा साफ़ हालत में थी। सबसे ज्यादा खराब स्थिति साफ़-सफाई को लेकर ही नज़र आई। परिसर में जगह-जगह कचरा फैला नज़र आया। छात्रों के कमरों के बाहर भी साफ-सफाई की नहीं थी। इसके अलावा छात्रावास के बाथरूम और शौचालयों की हालत और भी चिंताजनक है। यहां गंदगी का हाल ऐसा है की बदबू से कुछ पल खड़े रहना भी मुश्किल है। कई शौचालयों के दरवाजे टूट चुके हैं वहीं दो शौचालयों पर ताले लटके मिले। बड़ी संख्या में छात्रों की क्षमता वाले इस छात्रावास में उपयोग के लिए केवल एक ही शौचालय उपलब्ध है।
इस सब के अलावा यहां पानी की भी गंभीर समस्या बनी हुई है। हॉस्टल की छत पर रखी पानी की एक टंकी क्षतिग्रस्त है। जबकि अन्य टंकियों में गंदा पानी भरा हुआ है। जो चिंताजनक है। आउटडोर खेल मैदान बदहाल स्थिति में है। इंडोर हॉल पर ताला लटका हुआ था। मतलब खेल और मनोरंजन के साधन भी नाम के ही हैं।
छात्रावास अधीक्षक मोहित चौबे हॉस्टल में मौजूद नहीं थे। जिनसे सम्पर्क नहीं हो सका। छात्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अधीक्षक के पास इस छात्रावास के अलावा जैसीनगर और पास ही स्थित एक अन्य छात्रावास की भी जिम्मेदारी है। एक ही अधिकारी पर तीन छात्रावासों का प्रभार है। जिससे सारी व्यवस्थाएं लड़खड़ाई हुई हैं।
खैर जिम्मेदार अधिकारीयों को इन सब ममलों से अवगत कराया गया है। छात्रों को उम्मीद है की जल्द ही समस्याओं का समाधान किया जाएगा। वहीं देखना दिलचस्प होता की इस बात को कितना प्राथमिकता से और गंभीरता से लिया जाता है। और कब समस्याओं से छात्रों को निजात मिल पाती है।