देवरी ईको सेंटर में जन्मे 34 नन्हें घड़ियाल, चंबल में गूंजी किलकारियां, वन विभाग में खुशी की लहर
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य से एक बेहद रोमांचक और खुश कर देने वाली खबर सामने आई है। एमपी के मुरैना के देवरी ईको सेंटर में प्रकृति का अद्भुत नजारा देखने को मिला, जहां अंडों से 34 नन्हें घड़ियाल शावकों ने जन्म लिया। इन मासूम शावकों के बाहर आते ही वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। जानकारी के मुताबिक वन विभाग की टीम मई महीने की शुरुआत में चंबल नदी के अप-स्ट्रीम बरौली घाट और डाउन-स्ट्रीम बाबू सिंह का घेर घाट क्षेत्र से 100-100 अंडे सुरक्षित तरीके से एकत्र कर देवरी ईको सेंटर लाई थी। अधिकारियों के अनुसार मादा घड़ियालों ने मार्च महीने में इन अंडों को दिया था।
अब इन अंडों में से सबसे पहले बरौली घाट क्षेत्र के अंडों से 34 नन्हें घड़ियाल शावक बाहर आए हैं। जैसे ही इन शावकों ने खोल तोड़कर दुनिया में कदम रखा, वहां मौजूद वन अमले ने पूरे घटनाक्रम को बेहद खास बताया। वन विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि अप-स्ट्रीम क्षेत्र के अंडों से पहले हैचिंग होना हर साल देखने को मिलता है। फिलहाल अगले दो से तीन दिनों में बाकी अंडों से भी शावकों के बाहर आने की संभावना जताई जा रही है। वहीं बाबू सिंह का घेर घाट क्षेत्र से लाए गए अंडों की हैचिंग मई के आखिरी सप्ताह या जून के पहले सप्ताह में शुरू हो सकती है।
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य घड़ियाल संरक्षण के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। घड़ियाल एक दुर्लभ और विलुप्तप्राय प्रजाति मानी जाती है। ऐसे में 34 नए शावकों का जन्म जैव विविधता संरक्षण की दिशा में बड़ी सफलता माना जा रहा है। वन विभाग का कहना है कि इन शावकों की विशेष निगरानी की जाएगी और उचित समय आने पर इन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।