विकास कार्यों के हकीकत की खुली पोल, कलेक्टर का वाहन फंसा कीचड़ में, ग्रामीण बोले देख लो विकास !
विकास कार्यों और व्यवस्थाओं की उस वक़्त पोल खुल गई जब खुद कलेक्टर का वाहन कीचड़ में फंस गया। जहां प्रशासनिक अमले के सामने ही दलदल में गाड़ी फंसने से विकास की हकीकत सामने आ गयी। दरअसल जबलपुर कलेक्टर शहपुरा तहसील के पावला गांव में निरीक्षण करने पहुंचे थे। जहां कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की गाड़ी कीचड़ में फंस गई। जिसे निकालने की जद्दोजहद और धक्का मार कोशिश शुरू हुई।
लेकिन कीचड़ इतनी गज़ब की थी की उसमें से वाहन निकल नहीं पा रहा था। जिसके बाद जेसीबी को भी बुलाना पड़ा। तब कहीं कलेक्टर की गाड़ी निकाली जा सकी। वहीं इस दौरान ग्रामीणों का गुस्सा भी फूट पड़ा और उन्होंने मौके पर ही कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार का घेराव किया। दरअसल गांव की बदहाल सड़कें, बहता गंदा पानी और अधूरे विकास कार्य से ग्रामीणों में नाराज़गी है।
बताया गया की कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों का जायजा लेने निकले थे। जब उनका काफिला बरगी क्षेत्र के पावला गांव पहुंचा तभी उनका वाहन कीचड़ में फंस गया। अधिकारियों के सामने विकास की हकीकत सामने आ गई। गांव की मुख्य सड़क दलदल बनी हुई थी। जगह-जगह गंदा पानी भरा हुआ था। ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों को घेरते हुए सरपंच कमलेश पटेल, सहायक सचिव और संबंधित अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के अलावा अनियमितताओं के आरोप लगाए। ग्रामीणों का कहना था कि गांव में विकास कार्य सिर्फ फाइलों और कागजों में पूरे दिखा दिए गए।
जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। ग्रामीणों का ये भी आरोप था की सड़क, नाली और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं के नाम पर लाखों रुपए खर्च किए गए। लेकिन गांव आज भी कीचड़ और गंदगी में डूबा हुआ है कहा गया की जब गर्मियों में ये हाल हैं तो बारिश में क्या होगा आप अंदाजा लगा सकते हैं। हालात बद से बदतर हो जाते हैं। नालियों का घटिया निर्माण होने से पानी निकासी नहीं हो पा रही जिससे जगह-जगह गंदगी पसरी है।
कार्यवाई न होने पर ग्रामीणों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।------