खाद्य विभाग टीम की कार्यवाई सवालों के घेरे में, साथ आ रहे प्राइवेट लोग, वसूली के आरोप !
खाद्य विभाग द्वारा प्रतिष्ठानों की जांच की जा रही है जिसमें एक बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है। जहाँ आरोप है की टीम के साथ कथित रूप से प्राइवेट कर्मचारी भी आ रहे हैं जो खुद को टीम को हिस्सा बताते हुए लायसेंस जांचते हैं। जिसके बाद व्यापारियों ने जांच की मांग की है। मामला एमपी के जबलपुर जिले का है। खाद्य विभाग की कार्यवाई सवालों के घेरे में है क्योंकि उन पर वसूली जैसे गंभीर आरोप लग रहे हैं व्यापारियों का कहना ही की आखिर चेकिंग अभियान में प्राइवेट लोग किस हैसियत से घूम रहे हैं। यह पूरा नज़ारा कैमरे में भी कैद हुआ है।
बताया गया की होटल, रेस्टोरेंट, डेयरी और खाद्य प्रतिष्ठानों पर जांच के लिए पहुंच रही टीमों के साथ कथित प्राइवेट कर्मचारियों की वजह से व्यापारियों में आक्रोश पनप रहा है। आरोप हैं कि विभागीय अधिकारियों के साथ कुछ प्राइवेट कर्मचारी भी कार्रवाई में शामिल हो रहे हैं। जो खुद को टीम का हिस्सा बताकर लाइसेंस जांचते हैं। दस्तावेज मांगते हैं और कार्रवाई का डर दिखाकर कथित वसूली करते हैं। आरोप है की खाद्य सुरक्षा के नाम पर चल रही कार्रवाई अब सेटिंग और उगाही का जरिया बनती जा रही है। इस पूरे मामले ने तूल उस समय पकड़ा जब जबलपुर सीआईडी में पदस्थ अधिकारी विशाखा तिवारी ने चौथा पुल स्थित सेरेनडिपिटी रेस्टोरेंट में पैक्ड पानी की बोतलों में गंदगी मिलने की शिकायत की। दरअसल बीते 14 मई की दोपहर भोजन के दौरान जब बोतल खोली गई तो पानी में कचरा तैरता दिखाई दिया। शिकायत के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी देवेन्द्र दुबे और संजय गुप्ता और निजी व्यक्ति मौके पर पहुंचा। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच के बाद क्या कार्रवाई हुई। इसकी जानकारी अगले दिन रात तक भी नहीं दी गई। जब मीडिया की टीम मौके पर पहुंची तो आरोप है की जांच अधिकारी कार्रवाई के नाम पर डील करते नज़र आये। तभी एक प्राइवेट व्यक्ति रेस्टोरेंट संचालक से पूछताछ करता और दस्तावेज देखता नजर आया। लेकिन कैमरे देखते ही यह भाग निकला। व्यापारियों ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।--