पत्नियां ससुराल छोड़कर जा रही मायके, पानी से मचा हाहाकार, बूंद-बूंद पानी को तरसता गांव !
कहते हैं की बिन पानी सब सून, जी हां ये बात बिलकुल सच है की अगर पानी न हो तो कुछ भी संभव नहीं है। लेकिन विकास के वाडे और दावों के बीच एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है जिसे सुनकर आप भी चौंक जाएंगे। जहां पानी की वजह से परिवारों पर संकट आ रहा है और परिवार उजड़ रहे हैं। दरअसल जलसंकट की वजह से बहुएं अब ससुराल छोड़कर मायके में जा रही हैं। मामला एमपी के नवगठित मऊगंज जिले का है। जहां लगातार जलसंकट गहराता जा रहा है और अब ये लोगों की बड़ी मुसीबत भी बन गया है। हनुमना के कोढ़वा गांव में पानी की त्रासदी मची हुई है। जिससे बहुएं ससुराल छोड़ मायके पलायन कर रही हैं। क्योंकि नल से पानी भरना किसी चुनौती से कम नहीं है।
आपको नज़ार आने वाली ये तस्वीरें मऊगंज के हनुमना विकासखंड के कोढ़वा गांव की हैं। यहां सुबह से ही पानी के लिए जद्दोजहद शुरू हो जाती है। सुबह के 4 बजते ही गाँव की महिलाएं नींद छोड़, हाथों में बाल्टियां लेकर पानी लेने निकल पड़ती हैं। पथरीला इलाका होने के कारण पाताल में जा चुका जलस्तर अब ग्रामीणों के सब्र का इम्तिहान ले रहा है। बताया गया की 2 किलोमीटर के दायरे में महज एक सरकारी नल है जहाँ एक बाल्टी भरने में घंटों का समय बीत जाता है। गाँव की प्यास भी स्कूल के भरोसे है।
महिलाएं करीब डेढ़ किलोमीटर दूर गदाखुर स्कूल जाती हैं, जहाँ एक नल ही पूरे इलाके का सहारा है। गाँव का तालाब अब सिर्फ नाम का है जिसका जहरीला पानी जानवरों के पीने लायक भी नहीं बचा। महिलाओं को भारी भरकम बर्तन धोने पड़ रहे हैं। छोटे छोटे बच्चे भी पानी भरने में मदद कर रहे हैं। आर्थिक तंगी और पथरीली जमीन के कारण निजी बोरवेल कराना यहाँ के पुरुषों के लिए मुमकिन नहीं है। जिसकी वजह से पत्नियां प्यास से तंग आकर ससुराल छोड़ने का फैसला करती हैं। और पति बेबस रह जाता है। एक तरफ तो सरकार करोड़ों रूपये खर्च करती है पानी को लेकर कई दावे किये जाते हैं। लेकिन हकीकत कोसों दूर है। अब देखना दिलचस्प होगा की आखिर जिला प्रशासन इस प्यासे गाँव की प्यास कब दूर करता है।------