खाकी वर्दी पर 30 लाख की वसूली,CCTV फुटेज मिटाने के आरोप, तत्कालीन SP-TI समेत 4 पुलिस वालों पर FIR के आदेश !

 

खाकी वर्दी पर सिर्फ संगीन आरोप ही नहीं नहीं बल्कि दाग लगाए जाने के गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस अधिकारीयों पर अवैध वसूली और डकैती जैसे सिर्फ आरोप ही नहीं बल्कि सबूत मिटाने CCTV फुटेज डिलीट करने के भी आरोप हैं। जिस पर कोर्ट ने तत्कालीन एसपी थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए हैं। मामला ग्वालियर जिले का है। जो 30 लाख रूपये की वसूली से जुड़ा हुआ है।

 

 

 

 

दरअसल थाटीपुर थाना क्षेत्र का ये पूरा घटनाक्रम बताया जा रहा है। जहां अनूप नाम के व्यक्ति के भाई के खिलाफ धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। मामला पैसों के लेनदेन से जुड़ा था। जिसमें चार फरियादियों में आपसी राजीनामा होना था। उन्होंने खुद जांच अधिकारी को यह जानकारी दी कि समझौता हो चुका है आरोपी का नाम एफआईआर से हटाया जाए। आरोप है कि यहीं से ये पूरा खेल शुरू हुआ। कोर्ट में दायर परिवाद के मुताबिक जांच अधिकारी अजय सिकरवार ने फरियादियों से भी पैसों की मांग की और अनूप के भाई पक्ष से भी। अनूप की ओर से पहले ही करीब 4 लाख 90 हजार रुपए विवेचना अधिकारी को दिए जा चुके थे। लेकिन जब पुलिस अधिकारी को यह एहसास हुआ कि मामला बड़े पैसों का है।

 

 

 

 

 

तब 24 दिसंबर 2023 को अनूप को कथित रूप से बंधक बनाकर उसके घर से साढ़े 9 लाख रुपए उठवाए गए। आरोप है कि आरक्षक संतोष वर्मा के जरिए यह रकम ली गई। तभी मामले में शामिल एक अन्य महिला चंद्रलेखा जैन के घर से भी करीब 15 लाख रुपए उठवाए गए। दोनों जगहों से 30 लाख रुपए लिए जाने का आरोप है। इन पैसों के अलावा फरियादियों को रुपये देने का दबाव भी बनाया गया। इसके बाद अनूप ने तत्कालीन ग्वालियर एसपी राजेश चंदेल से शिकायत की, मामला थाने तक पहुँचते ही शिकायतकर्ता अनूप को ही इस प्रकरण में आरोपी बना लिया गया। जमानत मिलने के बाद अनूप ने कोर्ट में परिवाद दायर किया। जिसमें तत्कालीन एसपी राजेश चंदेल, टीआई सुरेंद्र नाथ यादव, जांच अधिकारी एसआई अजय सिकरवार और आरक्षक संतोष वर्मा को आरोपी बनाया गया। परिवाद के साथ कोर्ट में एक महत्वपूर्ण आवेदन भी पेश किया गया। जिसमें 24 और 25 दिसंबर 2023 की CCTV फुटेज सुरक्षित मंगवाने की मांग की गई थी।

 

 

 


शिकायतकर्ता का दावा था कि उसी फुटेज में पैसे से भरे लाल रंग के बैग और पूरी लेन-देन की घटनाएं कैद हैं। लेकिन जब कोर्ट ने CCTV फुटेज पेश करने पुलिस को आदेश दिए, तब पुलिस की ओर से जवाब दिया गया कि फुटेज उपलब्ध नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने कारण बताओ नोटिस जारी किया। रेडियो उप पुलिस अधीक्षक की जांच में सामने आया कि 3 जनवरी 2024 के पहले की CCTV फुटेज डिलीट कर दी गई थी। ऐसे में कोर्ट ने आदेश में कहा कि मामला बेहद गंभीर है। क्योंकि आरोप उन लोगों पर हैं जो स्वयं कानून के रक्षक हैं और कानून की बारीकियों से भली-भांति परिचित हैं। कोर्ट ने माना कि पहले अपराध किया गया बाद में सबूत मिटाने का प्रयास भी किया गया। इसी आधार पर विशेष न्यायालय ने डकैती के चारों आरोपियों के खिलाफ IPC की अलग-अलग धाराओं में प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अब बड़ा सवाल ये है की अब पुलिस अधिकारी और पुलिस कर्मियों पर क्या कार्यवाई होती है।------


By - sagar tv news
14-May-2026

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