अपहरण के बाद युवक की काटी थी नाक,कोर्ट ने माना गंभीर मामला,आरोपी को 3 साल की सजा और जुर्माना !
युवक का अपहरण करने के बाद उसकी नाक काटने के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। जहां आरोपी को तीन साल की सजा का एलान किया गया है। साथ ही 10 हजार रूपये का जुर्माना भी लगाया गया है। बताया जा रहा है की एमपी के ग्वालियर से सामने आये इस मामले में गवाहों के पलटने के बाद कोर्ट का सख्त फैसला आया है। आरोपी अजय परमार को 3 साल की सश्रम सजा सुनाई है।
अदालत ने गवाहों के मुकरने के बावजूद वैज्ञानिक साक्ष्यों और मेडिकल रिपोर्ट को आधार मानते हुए आरोपी पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। नाक काटने से जुड़ा यह मामला सामान्य बात नहीं है। क्योंकि इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में गवाहों के साथ फरियादी के द्वारा भी बयान बदल दिए थे। ऐसे में कोर्ट ने गंभीर आपराधिक मामलों में गवाहों के मुकरने और कोर्ट के बाहर समझौता कर लेने की पृवत्ति पर रोक लगाने के साथ आरोपी के बचने के रास्ते को देखते हुए यह सख्त रुख अपनाया है।
बता दें की यह पूरा मामला 16 अगस्त 2018 का है। बहोड़ापुर इलाके में आरोपी अजय परमार अपने साथियों के साथ फरियादी भोलू उर्फ विशाल को कार में अगवा कर ले गया था। वहां उसे मकान खाली करने के विवाद कर बेरहमी से मारपीट की। साथ ही धारदार हथियार से हमला कर उसकी नाक काट दी। ट्रायल के दौरान कैस तब कमजोर पड़ता नजर आया जब पीड़ित और उसका भाई अदालत में अपने बयानों से मुकर गए और हमलावरों को पहचानने से इनकार कर दिया। बचाव पक्ष ने भी समझौते का तर्क देकर आरोपी को बरी करने की मांग की। लेकिन अदालत ने इन दलीलों को खारिज किया।
और कहा की गवाह झूठ बोल सकते हैं लेकिन मेडिकल रिपोर्ट झूठ नहीं बोल सकती। सीटी स्कैन में नेजल बोन फ्रैक्चर की पुष्टि और घटना के तुरंत बाद दर्ज कराई गई देहाती नालसी को कोर्ट ने पुख्ता आधार माना। सुप्रीम कोर्ट के खुज्जी बनाम मध्य प्रदेश राज्य फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि गवाह की मुख्य परीक्षा का विश्वसनीय हिस्सा सजा का आधार बन सकता है ऐसे में कोर्ट ने 3 साल की सश्रम सजा के साथ आरोपी पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। वहीं 8 हजार रुपए पीड़ित को मुआवजे के तौर पर देने के निर्देश भी दिए।
मामले में ग्वालियर जिला कोर्ट के शासकीय अधिवक्ता धर्मेंद्र शर्मा ने जानकारी दी।-----