50 लाख का दहेज लौटाकर रच दी मिसाल, राजावत परिवार ने दिया समाज को बड़ा संदेश | SAGAR TV NEWS |
एमपी के उज्जैन से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो समाज को नई दिशा देने वाली है। जहां एक ओर दहेज प्रथा आज भी कई परिवारों पर बोझ बनी हुई है, वहीं राजावत परिवार ने 50 लाख रुपए का दहेज लौटाकर एक मिसाल कायम कर दी। मामला उज्जैन जिले के बंगरेड गांव का है, जहां लोटस रिसॉर्ट में आयोजित तिलक समारोह के दौरान एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला। इंदौर के देपालपुर क्षेत्र से आए वधु पक्ष के किसान महेंद्र सिंह पंवार अपनी बेटी बिंदिया कुमारी के लिए 25 लाख रुपए नकद और करीब 15 तोला सोना लेकर पहुंचे थे।
जैसे ही तिलक की रस्म शुरू हुई, दूल्हे आदर्श दीप राजावत और उनके पिता जितेंद्र सिंह राजावत ने सबको चौंकाते हुए दहेज लेने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें दहेज नहीं, बल्कि रिश्तों की सच्चाई और सम्मान चाहिए। उन्होंने केवल एक सोने की अंगूठी को प्रतीक के रूप में स्वीकार किया। इस फैसले से समारोह में मौजूद लोग कुछ पल के लिए हैरान रह गए, लेकिन फिर तालियों की गूंज के साथ पूरे परिवार की सराहना होने लगी। ग्रामीणों और समाज के लोगों ने इसे दहेज प्रथा के खिलाफ एक साहसिक और प्रेरणादायक कदम बताया।
दूल्हे के पिता जितेंद्र सिंह राजावत, जो क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष भी हैं, ने कहा कि दहेज एक सामाजिक बुराई है, जिसे खत्म करने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि कई गरीब परिवार दहेज के बोझ तले दब जाते हैं, ऐसे में इस तरह की पहल बदलाव की शुरुआत बन सकती है। आदर्श दीप राजावत, जो एक सफल व्यवसायी हैं, की शादी नवंबर 2026 में बिंदिया कुमारी से तय है। तिलक समारोह में लौटाई गई राशि और आभूषण पूरे सम्मान के साथ वधु पक्ष को वापस कर दिए गए। उज्जैन का यह उदाहरण सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक संदेश है—कि रिश्ते पैसे से नहीं, बल्कि सम्मान और समझ से बनते हैं।