MP में कमाल! बिना सर्जरी 6 साल की बच्ची के दिल का छेद बंद, विंध्य में पहली सफलता
एमपी के रीवा के विंध्य क्षेत्र से स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। यहां सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में डॉक्टरों ने 6 साल की एक बच्ची के दिल में मौजूद जन्मजात छेद को बिना ओपन सर्जरी के सफलतापूर्वक बंद कर दिया। इस तरह की यह विंध्य क्षेत्र की पहली पेडियाट्रिक कार्डियक प्रक्रिया मानी जा रही है। पन्ना निवासी नायरा बानो को जन्म से ही दिल में छेद की समस्या थी, जिसे मेडिकल भाषा में PDA—Patent Ductus Arteriosus कहा जाता है। इस बीमारी के कारण बच्ची का वजन नहीं बढ़ रहा था, उसे जल्दी थकान होती थी और वह बार-बार बीमार पड़ती थी। परिजनों ने कई जगह इलाज कराया, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं मिल सका।
रीवा के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में जांच के दौरान इकोकार्डियोग्राफी से पता चला कि बच्ची के दिल की दो बड़ी रक्त वाहिकाओं के बीच असामान्य कनेक्शन है। यह एक जटिल स्थिति थी और अस्पताल में पहली बार इस तरह की प्रक्रिया की जा रही थी, जिससे चुनौती और भी बढ़ गई। कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. एस.के. त्रिपाठी और उनकी टीम ने कैथ लैब तकनीक का उपयोग करते हुए बिना ओपन सर्जरी के इस छेद को बंद कर दिया। यह प्रक्रिया पूरी तरह सफल रही और अब बच्ची की हालत स्थिर है। वह सामान्य गतिविधियां भी कर पा रही है, जो परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं।
खास बात यह है कि यह पूरा इलाज आयुष्मान योजना के तहत किया गया, जिससे परिवार पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ा। इस सफलता में एनेस्थेटिस्ट, टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ की भी अहम भूमिका रही। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि इस उपलब्धि से अब विंध्य क्षेत्र के मरीजों को बड़े शहरों में रेफर करने की जरूरत कम होगी। यह सफलता न केवल चिकित्सा क्षेत्र में नई उम्मीद जगाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि अब आधुनिक इलाज सुविधाएं छोटे शहरों में भी उपलब्ध हो रही हैं।