एक हैंडपंप पर टिका 700 परिवारों का जीवन! MP में जल संकट से हाहाकार
तेज गर्मी के साथ पानी का संकट भी गहराता जा रहा है… लेकिन एमपी के बालाघाट के एकोड़ी गांव में हालात ऐसे हैं कि यहां पानी के लिए हर दिन जंग जैसी स्थिति बन रही है। 700 परिवारों का जीवन सिर्फ एक हैंडपंप के भरोसे चल रहा है। नगर मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर स्थित एकोड़ी गांव में जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। गांव में कुल 12 हैंडपंप हैं, लेकिन इनमें से 4 खराब पड़े हैं और 7 से निकलने वाला पानी इतना खारा है कि पीने लायक नहीं है। ऐसे में पूरे गांव की आधे से ज्यादा आबादी सिर्फ एक 40 साल पुराने हैंडपंप पर निर्भर है।
सुबह होते ही इस हैंडपंप के पास बर्तनों की लंबी कतार लग जाती है। महिलाएं और बच्चे घंटों इंतजार करते हैं, तब कहीं जाकर पीने का पानी मिल पाता है। जिन घरों में निजी बोरवेल हैं, वे भी दूसरों की मदद कर रहे हैं, लेकिन यह राहत नाकाफी है। सरकार जहां नल-जल योजना के जरिए हर घर तक पानी पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं एकोड़ी गांव की तस्वीर इन दावों की पोल खोल रही है। यहां 2024 तक पूरी होने वाली जल योजना आज 2026 में भी अधूरी पड़ी है।
हैरानी की बात ये है कि विभागीय अधिकारी दावा कर रहे हैं कि 8 हैंडपंपों का पानी पीने योग्य है, जबकि ग्रामीण इसे पूरी तरह गलत बता रहे हैं। उनका कहना है कि कागजों में सब कुछ ठीक दिखाया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत बेहद खराब है। इतना ही नहीं, सीएम हेल्पलाइन में शिकायत करने वाले युवक पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक संवेदनहीनता साफ नजर आती है। वहीं क्षेत्रीय विधायक विवेक पटेल ने भी इस हालात के लिए पीएचई विभाग को जिम्मेदार ठहराया है और जल्द समाधान की मांग की है। सवाल बड़ा है—जब शहर से महज 5 किलोमीटर दूर ऐसा हाल है, तो दूर-दराज गांवों की स्थिति क्या होगी? अब देखना होगा कि प्रशासन कब जागता है और एकोड़ी के लोगों को राहत मिलती है।