समाजसेवी निभा रहे मायरे की रस्म, अलग से भांजियों को देंगे तोहफे, भव्य तैयारियां जोरों पर

एक तरफ जहां मुख्य्मंत्री कन्यादान योजना को लेकर शहर भर में उत्साह का माहौल है तो वहीं एक ऐसे भी समाजसेवी हैं जो मामा का फर्ज अदा कर रहे हैं। वो न सिर्फ मायरे की रस्म निभाएंगे बल्कि ज़रूरतमंद परिवारों और बहनों के लिए ख़ास तोहफे भी देंगे। यही नहीं दूल्हों को भी उपहार दिए जाएंगे। इसी को लेकर वह बाज़ार पहुंचे और जमकर खरीददारी की। तस्वीरें उज्जैन जिले के नागदा की हैं। जहां भांजियों के लिए समाजसेवी चेतन यादव मामा बने हैं।
दरसल प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत नागदा जंक्शन में सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित होने वाला है। जिससे शहर में उत्साह और उमंग का माहौल है। इस मौके पर सिर्फ सरकारी महकमा ही नहीं, बल्कि शहर के गणमान्य नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता भी बढ़-चढक़र अपनी पारिवारिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

 

 

 

योजना के अंतर्गत विवाह बंधन में बंधने जा रही गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बहनों और भांजियों के लिए सामाजिक कार्यकर्ता चेतन यादव ने एक अनूठी और भावुक पहल की है। वे इन कन्याओं के लिए मामा की भूमिका निभाते हुए मामेरे (मायरा) की पवित्र रस्म अदा करेंगे। बाजारों में खासी रौनक देखने को मिली, जहां शादी से जुड़ी कई सामग्रियों की पूरे उत्साह के साथ खरीदारी की गई। इस नेक काम में सर्वसमाज की भागीदारी देखने को मिल रही है। जो नागदा में सामाजिक समरसता की एक बेहतरीन मिसाल पेश कर रही है। खरीदारी के दौरान अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की प्रतिनिधि हेमलता तोमर और जैन समाज के वरिष्ठ मार्गदर्शक सतीश जैन सांवेरवाला भी चेतन यादव के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बाजार पहुंचे।

 

 

 

 

 

जहां दुल्हनों के श्रृंगार और सुहाग की निशानियों को बड़े ही चाव से चुना। उन्होंने अपनी भांजियों के लिए सुहाग की प्रतीक बिंदिया, खनकती हुई रंग-बिरंगी चूडिय़ां, हाथों में रचने वाली मेहंदी और अन्य जरूरी सुहाग सामग्री की जमकर खरीदारी की। सिर्फ दुल्हनों के लिए ही नहीं, बल्कि होने वाले दामादों (दूल्हों) का भी पूरा सम्मान रखा गया है। खरीदारी के इसी विशेष दौर में चेतन यादव ने दूल्हे के लिए एक बेहद आकर्षक और शानदार कलाई घड़ी भी खरीदी, जो विवाह मंडप में सप्रेम भेंट की जाएगी। भारतीय संस्कृति और परंपराओं में मायरा या मामेरा की रस्म का बहुत गहरा भावनात्मक महत्व है। यह रस्म भाई-बहन और मामा-भांजी के अटूट और पवित्र प्रेम को दर्शाती है। जब कोई नागरिक इस तरह किसी सामान्य परिवार की बेटियों के लिए मामा बनकर आगे आता है, तो इससे न सिर्फ उस परिवार का आर्थिक और मानसिक संबल बढ़ता है, बल्कि पूरे समाज में भाईचारे का एक सकारात्मक संदेश जाता है।


By - sagar tv news
18-Apr-2026

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