सागर- स्कूल बंद नहीं, सुधार करो, सागर में स्कूल मर्ज करने के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन
सागर जिले में सरकारी स्कूलों को मर्ज कर बंद करने की नीति के खिलाफ विरोध तेज होता जा रहा है। “स्कूल बचाओ संघर्ष समिति” के बैनर तले सैकड़ों छात्र, अभिभावक और सामाजिक कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और जिलान्यायाधीश को ज्ञापन सौंपकर इस फैसले पर तुरंत रोक लगाने की मांग की। समिति के प्रतिनिधि राजेश कुशवाहा ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग द्वारा शहर के 20 से ज्यादा सरकारी स्कूलों को सांदीपनी विद्यालय में मर्ज कर बंद किया जा रहा है। यही स्थिति बंडा तहसील में भी देखने को मिली है, जहां 5 स्कूलों को पहले ही मर्ज किया जा चुका है। सबसे गंभीर बात यह है कि इन स्कूलों में अब नए प्रवेश भी बंद कर दिए गए हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिन स्कूलों को बंद किया जा रहा है, उनमें औसतन 100 के करीब छात्र पढ़ते हैं। ऐसे में स्कूलों को बंद करने के बजाय उनकी व्यवस्थाओं में सुधार करना चाहिए था। लेकिन सरकार का यह कदम हजारों छात्रों के भविष्य को संकट में डाल रहा है। समिति ने यह भी आरोप लगाया कि यह नीति शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में उठाया गया कदम है। साथ ही, टीईटी परीक्षा के नाम पर शिक्षकों को बाहर करने की साजिश भी बताई जा रही है।
प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब पास के स्कूल बंद होंगे, तो छोटे बच्चे दूर पढ़ने कैसे जाएंगे? एक तरफ सरकार “स्कूल चलें हम” और “बेटी पढ़ेगी, देश बढ़ेगा” जैसे नारे देती है, वहीं दूसरी तरफ स्कूलों को बंद किया जा रहा है। ज्ञापन में मांग की गई है कि किसी भी स्कूल को मर्ज न किया जाए, बल्कि उनमें बेहतर सुविधाएं—जैसे किताबें, बिजली, पानी और शिक्षकों की उपलब्धता—सुनिश्चित की जाए। साथ ही सभी स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग की भी मांग उठाई गई। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस फैसले को वापस नहीं लिया गया, तो जिलेभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल यह मुद्दा शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।