Sagar- शिक्षक बदल रहे गांवों की तकदीर, ‘सचल रथ’ पर दौड़ते शिक्षक का ऐसा जूनून...
सागर में एक सरकारी शिक्षक आज हजारों लोगों के लिए मिसाल बन चुके हैं। दिव्यांग होने के बावजूद उनका जज़्बा इतना मजबूत है कि वे हर दिन नई उम्मीद जगा रहे हैं। जहां कई लोग छोटी-छोटी परेशानियों में हार मान लेते हैं, वहीं ये शिक्षक यह साबित कर रहे हैं कि अगर इरादे बुलंद हों तो कोई भी कमी रास्ता नहीं रोक सकती।
पिछड़े ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र में काम करते हुए वे हर साल अपने स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ा रहे हैं। लेकिन उनका मिशन सिर्फ स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। वे आसपास के आधा दर्जन से ज्यादा गांवों में चौपाल लगाते हैं, लोगों की समस्याएं सुनते हैं और उन्हें समाधान की दिशा दिखाते हैं। उनके लिए न दिन मायने रखता है, न रात—जब भी किसी को जरूरत होती है, वे अपनी “सचल रथ” पर सवार होकर मदद के लिए निकल पड़ते हैं।
सागर-ललितपुर बॉर्डर के सेसई गांव के रहने वाले रंजीत लोधी बचपन से ही एक पैर से कमजोर हैं। लेकिन उन्होंने इस कमजोरी को अपनी ताकत में बदल दिया। कड़ी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने पढ़ाई में सफलता हासिल की और अपने परिवार में सरकारी नौकरी पाने वाले पहले सदस्य बने। यह उपलब्धि ही उनकी सोच और संघर्ष की गहराई को दर्शाती है।
पिछले कई वर्षों से शिक्षक के रूप में सेवा दे रहे रंजीत लोधी वर्तमान में बंडा तहसील के शासकीय हाई स्कूल पथरिया गौड़ में पदस्थ हैं। यहां सिर्फ 9वीं और 10वीं तक की कक्षाएं लगती हैं, लेकिन उनका विजन इससे कहीं आगे है। वे बच्चों को 12वीं और कॉलेज तक की पढ़ाई के लिए मार्गदर्शन देते हैं, साथ ही पुलिस, आर्मी और अग्निवीर जैसी सेवाओं की तैयारी भी करवाते हैं।
उन्होंने अपनी दिव्यांग गाड़ी को “सचल रथ” नाम दिया है—और सच में यह रथ सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि बदलाव की यात्रा है। छुट्टी के दिन वे 7 गांवों का दौरा करते हैं। लोग उनके आने का इंतजार करते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि रंजीत सिर्फ शिक्षक नहीं, बल्कि समस्या का समाधान लेकर आने वाले साथी हैं।
उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि जहां पहले स्कूल में बच्चों की संख्या बहुत कम थी, वहीं आज सिर्फ दो कक्षाओं में 150 से ज्यादा बच्चे पढ़ रहे हैं। यह आंकड़ा नहीं, बल्कि विश्वास और प्रेरणा की जीत है।
रंजीत लोधी की कहानी हमें यह सिखाती है कि असली ताकत शरीर में नहीं, सोच में होती है। अगर इरादा नेक हो और मेहनत सच्ची हो, तो एक इंसान पूरे समाज की दिशा बदल सकता है।