स्वर्ग की सीढ़ी बना चौगान दरबार, 4 हजार श्रद्धालु नंगे पांव, सिर पर कलश लेकर निकले
मध्य प्रदेश के मंडला जिले से आस्था, परंपरा और प्रकृति का एक ऐसा अद्भुत संगम सामने आया है, जिसे देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो रहा है। चौगान की मढ़िया में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने एक साथ आस्था की अनोखी मिसाल पेश की। यह दृश्य किसी स्वर्गिक अनुभव से कम नहीं था—चारों ओर हरियाली की चादर, सफेद वस्त्रों में सजे आदिवासी श्रद्धालु और सिर पर जवारे लिए नंगे पांव चलती हजारों लोगों की भीड़। ऐसा लग रहा था मानो धरती खुद मां की आराधना में लीन हो गई हो।
दरअसल, मंडला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित चौगान की मढ़िया में हर साल नवरात्रि पर यह भव्य आयोजन होता है। इस बार करीब 4 हजार श्रद्धालु एक साथ सिर पर जवारे लेकर करीब 3 किलोमीटर की यात्रा तय करते हुए रामनगर के पास मां नर्मदा में विसर्जन के लिए निकले। चौगान की मढ़िया को आदिवासी समाज ‘स्वर्ग की सीढ़ी’ मानता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मां के दरबार में की गई हर मन्नत पूरी होती है। यही वजह है कि यहां दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं।
नवरात्रि के दौरान यहां हजारों कलश और जवारे स्थापित किए जाते हैं। बांस की टोकरियों में उगे ये जवारे पूरे परिसर को हरियाली से ढक देते हैं, जो आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम पेश करते हैं। यहां की परंपरा के अनुसार, जिनकी मन्नत पूरी होती है, वे कलश चढ़ाते हैं और विधि-विधान से पूजन करते हैं। पूरे नौ दिन तक श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंदिर परिसर में ही ठहरते हैं और मां की भक्ति में लीन रहते हैं। विसर्जन यात्रा इस आयोजन का सबसे खास और भावुक पल होता है, जब हजारों लोग गीत-संगीत और जयकारों के साथ मां नर्मदा की ओर बढ़ते हैं। यह दृश्य सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, एकता और परंपरा की जीवंत तस्वीर है—जो हर साल यही संदेश देती है कि सच्ची श्रद्धा ही सबसे बड़ी शक्ति है।