Sagar - रामनवमी के जुलूस में उमड़ा जन सैलाब, जय श्री राम के उदघोष से गूंज उठा सागर
सागर में रामनवमी पर उत्सव समिति द्वारा 16वें वर्ष भगवान श्रीराम की भव्य पालकी शोभायात्रा निकाली गई। भक्ति और उत्साह के इस संगम में भगवान श्रीराम के बाल और युवा स्वरूप की प्रतिमाएं फूलों से सजी पालकी में विराजमान थीं, जिन्हें 51 श्रद्धालुओं ने अपने कंधों पर थाम रखा था। चंपाबाग हनुमान मंदिर से शुरू हुई यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए जब तीनबत्ती पहुंची, तो नजारा अद्भुत हो गया। यहां घरों की छतों से लगातार आधे घंटे तक हुई भव्य आतिशबाजी ने आसमान को सतरंगी रोशनी से सराबोर कर दिया। पूरा तीनबत्ती क्षेत्र जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। इस दौरान 7 वेदपाठी ब्राह्मणों ने पालकी में विराजे प्रभु श्रीराम की विधि-विधान से आरती उतारी।
रामनवमी पर दोपहर ठीक 12 बजे शहर आस्था में सराबोर हो गया। जैसे ही भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जन्म का समय हुआ, घरों से लेकर मंदिरों तक शंख, घंटियां और झालरों की ध्वनि गूंज उठी। मंदिरों में भय प्रगट कृपाला दीनदयाला, कौशल्या हितकारी... जय रघुनंदन जय सियाराम, जानकी क्ल्लभ सीताराम... के भजन के साथ वातावरण भक्तिमय हो गया। रामबाग, वृंदावन बाग, सिद्धेश्वर हनुमान मंदिर, मकरोनिया राम दरबार सहित शहर के विभिन्न राम मंदिरों में भक्तों ने विशेष आरती कर भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया। भक्तों ने भगवान श्रीराम की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आरती उतारी और प्रसाद वितरित किया। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और सुंदरकांड पाठ का आयोजन भी हुआ।
1 किलोमीटर लंबी पालकी यात्रा को 5 किलोमीटर का रूट तय करने में 3:30 घंटे का समय लग गया। यात्रा का शहर में 150 स्थानों पर स्वागत किया गया। यात्रा में 12 समाजों की झांकी आकर्षण का केंद्र रहीं। इनमें भगवान राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान जी की झांकी के साथ भगवान परशुराम, संत रविदास, महावीर स्वामी, गुरु नानक, झूलेलाल, मां कर्मा देवी, महाराजा अग्रसेन और भगवान विश्वकर्मा की झाकियां शामिल हुई। साथ ही नामदेव, प्रजापति, रैकवार समाज सहित अन्य समाजों के इष्ट देवों की झलकियां भी प्रस्तुत की गई, जिन्होंने सामाजिक समरसता का संदेश दिया।