आशा कार्यकर्ताओं की दयनीय स्थिति, जेवर गिरवी रख बच्चों का इलाज, खर्च के पड़े लाले !
जिन कन्धों पर घर की जिम्मेदारियां हैं। बच्चों का पालन पोषण है। और काम का तनाव है। उन्ही को आज बच्चों की परवरिश और इलाज कराने के लिए अपने जेवर गिरवी रखने पड़ रहे हैं। जी हां एमपी के उज्जैन जिले में कुछ ऐसा ही देखने को मिला। जहां आशा कार्यकर्ता को जेवर गिरवी रखकर घर चलाने को मजबूर होना पड़ रहा है। आलम ये है की कई महीनों से वेतन ही नहीं मिला है जिससे दयनीय स्थिति हो गयी है।
उज्जैन जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने वाली आशा और सुपरवाइजर कार्यकर्ता आज खुद आर्थिक तंगी से जूझ रही हैं। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि समय पर मानदेय न मिलने के कारण एक आशा सहयोगी को अपने बच्चे के इलाज और परिवार के भरण-पोषण के लिए अपने जेवरात तक गिरवी रखने पड़े। इसी को लेकर आशा और सुपरवाइजर कार्यकर्ता महासंघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर नियमित मानदेय और रुकी हुई राशि के भुगतान की गुहार लगाई है। महासंघ की प्रदेश महामंत्री सुमन पटेल ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि मानदेय अब टुकड़ों में डाला जा रहा है। जिससे कार्यकर्ताओं को भारी परेशानी हो रही है। उन्होंने मांग की है की हर महीने की 5 तारीख तक पूरा मानदेय एकमुश्त जमा किया जाए। वहीं जिलाध्यक्ष वंदना जोशी ने प्रशासन के भेदभावपूर्ण रवैये पर सवाल उठाते हुए बताया की साल 2023 की बढ़ी हुई राशि ताजपुर ब्लॉक की सुपरवाइजरों को अब तक नहीं मिली। साथ ही आंदोलन में शामिल होने पर केवल इसी ब्लॉक की कार्यकर्ताओं का वेतन काटा गया है जो कि पूरी तरह अनुचित है। वहीं महिदपुर तहसील की आशा सहयोगी लाड़कुंवर चौहान ने अपनी दर्दभरी दास्तां सुनाते हुए बताया की अक्टूबर महीने में एक मीटिंग में न जा पाने के कारण उन्हें काम से हटा दिया गया था। महासंघ के हस्तक्षेप के बाद बहाली तो हो गई। लेकिन पिछले पांच महीने से उन्हें वेतन नहीं दिया गया। बीमार बच्चे की देखभाल और घर चलाने के लिए उन्हें अपने जेवर गिरवी रखने पड़े। अधिकारी सिर्फ जल्द भुगतान का आश्वासन देकर उन्हें टाल रहे हैं। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी देते हुए कहा की समस्याओं का जल्द निराकरण न होने पर उग्र आंदोलन करने बाध्य होंगे।