ईरान-इजरायल में युद्ध का असर पहुंचा घरों के चूल्हों तक,होटलों में जल रही भट्टियां,संकट से जूझते लोग
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर भारत में भी देखने को मिल रहा है। जिससे सबसे ज्यादा LPG की समस्या देखने को मिल रही है। कई जगहों पर इसकी किल्लत मची हुई है। वहीं इसका असर अब बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन के चूल्हों तक भी पहुंच गया है। खाड़ी देशों में युद्ध जैसे हालात के कारण कमर्शियल गैस की सप्लाई चैन बुरी तरह प्रभावित हुई है। जिससे उज्जैन की व्यापारिक गतिविधियों पर ब्रेक लग गया है।
आलम यह है की कमर्शियल सिलेंडर की भारी किल्लत के चलते महाकाल मंदिर और बस स्टैंड क्षेत्र के करीब 1000 होटल-भोजनालयों के सामने संचालन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। मजबूरन कई होटल संचालकों ने दशकों पुराने पारंपरिक तरीके अपनाते हुए फिर से कोयले और लकड़ी की भट्टियां जलाना शुरू कर दिया है। ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालु भूखे न रहें। इसके अलावा इस बीच, घरेलू गैस की किल्लत की अफवाह ने आग में घी का काम किया है। कमी की आशंका के चलते शहर के हजारों उपभोक्ताओं ने एक साथ सिलेंडर बुकिंग शुरू कर दी।
जिससे गैस कंपनियों के सर्वर पर भारी दबाव बढ़ गया और तकनीकी खराबी आ गई। बुकिंग न होने से घबराए लोग बड़ी संख्या में एजेंसियों के बाहर जमा होने लगे। इस स्थिति पर गैस एजेंसी एसोसिएशन के अध्यक्ष और इंडियन गैस संचालक भगवान दास ऐरन ने उपभोक्ताओं को ढांढस बंधाया। उन्होंने साफ़ किया की शहर की सभी 17 गैस एजेंसियों के पास घरेलू एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक है और घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है।
ऑयल कंपनियों से सप्लाई निरंतर जारी है और केवल सर्वर डाउन होने से समस्या आई है। उन्होंने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें। घरों तक गैस की पहुंच निर्बाध बनी रहेगी। फिलहाल होटल संचालक इंडक्शन चूल्हों और लकड़ियों के सहारे व्यवस्था संभाल रहे हैं। वहीं घरेलू मोर्चे पर एसोसिएशन लोगों को पैनिक न होने की समझाइश दे रहा है।