सागर- धूम्रपान की कोई सुरक्षित सीमा नहीं! आईएमए सागर की चेतावनी, एक कश भी बना सकता है जानलेवा आदत
धूम्रपान करने वालों के लिए एक बड़ी चेतावनी सामने आई है। डॉक्टरों का साफ कहना है कि धूम्रपान की कोई भी सुरक्षित सीमा नहीं होती। यानी “कभी-कभार” या “थोड़ा-सा” धूम्रपान भी शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इसी संदेश को लेकर आज सागर में एक खास जागरूकता अभियान चलाया गया। सागर में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन यानी आईएमए सागर शाखा और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वाधान में सिविल अस्पताल मकरोनिया में धूम्रपान निषेध दिवस पर विशेष जागरूकता शिविर आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुनील जैन, डॉ. राजकुमार खरे, डॉ. विकास समेत कई डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आईएमए सागर शाखा के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने कहा कि समाज में एक गलत धारणा फैली हुई है कि जब तक धूम्रपान नियमित आदत न बन जाए तब तक इससे ज्यादा नुकसान नहीं होता। लेकिन चिकित्सा शोध बताते हैं कि कभी-कभार किया गया धूम्रपान भी शरीर को गंभीर हानि पहुंचा सकता है और धीरे-धीरे यह व्यक्ति को निकोटीन की लत में धकेल देता है।
उन्होंने बताया कि कम मात्रा में भी धूम्रपान करने से फेफड़े, मुंह, गले और ब्लैडर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा धूम्रपान से सीओपीडी यानी क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। डॉ. तल्हा साद के अनुसार भारत में करीब 10 प्रतिशत लोग धूम्रपान करते हैं, और हर साल लगभग 13 लाख लोगों की मौत तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण हो जाती है। पिछले एक दशक में सीओपीडी के मामलों में दोगुनी वृद्धि देखी गई है, जिनमें लगभग 70 प्रतिशत पुरुष और 30 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं।
उन्होंने प्रदेश में हुक्का बार पर लगे प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने की जरूरत बताई। कई स्थानों पर कैफे या रेस्तरां की आड़ में हुक्का बार संचालित किए जा रहे हैं, जहां तंबाकू और निकोटीन युक्त फ्लेवर का इस्तेमाल किया जाता है, जो युवाओं के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को केवल एक दिन नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी के लिए धूम्रपान छोड़ने के लिए प्रेरित करना था।
डॉक्टरों ने एक सकारात्मक तथ्य भी बताया अगर कोई व्यक्ति धूम्रपान छोड़ देता है, तो केवल 14 दिनों के भीतर ही रक्त संचार और फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार शुरू हो जाता है, और लगातार 6 महीने तक धूम्रपान न करने पर 90 प्रतिशत से अधिक सुधार देखा जा सकता है। डॉक्टरों का साफ संदेश है धूम्रपान से दूरी ही बेहतर जिंदगी की गारंटी है।