Sagar-खुरई में बुंदेली फाग की गूंज, ढोलक-नगाड़ों की थाप पर देर रात तक झूमे लोग
होली का पर्व और बुंदेलखंड की धरती पर बुंदेली फाग गीतों की गूंज… यह नजारा हर साल लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। सागर जिले के खुरई शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों बुंदेली फाग गीतों की धूम मची हुई है। सुबह से लेकर देर रात तक गांव-गांव में फाग की टोलियां ढोलक और नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक गीत गाकर होली के उत्सव को और भी रंगीन बना रही हैं।
दरअसल बुंदेलखंड की सांस्कृतिक परंपराओं में फाग गीतों का विशेष महत्व है। होली के दिन से ही इन गीतों की शुरुआत हो जाती है, जो कई दिनों तक लगातार चलती रहती है। खुरई नगर और आसपास के गांवों में लोग टोली बनाकर एक-दूसरे के घरों और चौपालों पर पहुंचते हैं और ढोलक, मंजीरा व नगाड़ों की धुन पर पारंपरिक बुंदेली फाग गाते हैं।
फाग गीतों में भगवान श्रीकृष्ण और राधा के प्रसंगों के साथ-साथ हास्य, व्यंग्य और लोकजीवन की झलक भी देखने को मिलती है। यही वजह है कि इन गीतों को सुनने और गाने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित होते हैं। फाग की धुन शुरू होते ही माहौल पूरी तरह होली के रंग में रंग जाता है और लोग झूमने लगते हैं।
खुरई क्षेत्र के कई गांवों में इन दिनों विशेष रूप से फाग संगीत के आयोजन किए जा रहे हैं। ग्रामीण अपनी पारंपरिक वेशभूषा में टोली बनाकर फाग गाते हैं और एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर खुशियां मनाते हैं। ढोलक की थाप और लोकगीतों की मधुर धुन पूरे वातावरण को उत्सवमय बना देती है।
रंगपंचमी के मौके पर भी फाग गीतों की धूम देखने को मिली। कई स्थानों पर देर रात तक फाग का आयोजन चलता रहा और लोग पूरे उत्साह के साथ इसका आनंद लेते नजर आए।
बुंदेली फाग केवल एक लोकगीत परंपरा ही नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। यही कारण है कि हर साल होली के मौके पर यह परंपरा पूरे क्षेत्र में उत्साह और उल्लास के साथ जीवंत हो उठती है।