MP की पहली कृषि कैबिनेट से किसानों को 27 हजार करोड़ की सौगात, नागलवाड़ी में इतिहास रचा !
मध्यप्रदेश की सियासत और कृषि नीति में आज एक नया अध्याय जुड़ गया। जनजातीय बहुल बड़वानी जिले के नागलवाड़ी स्थित शिखरधाम में प्रदेश की पहली कृषि कैबिनेट बैठक आयोजित हुई। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई यह ऐतिहासिक बैठक न सिर्फ प्रतीकात्मक रही, बल्कि किसानों और आदिवासी अंचल के लिए ठोस फैसलों के साथ नई दिशा भी तय कर गई। भगवान भीलट देव की पावन भूमि से “किसान कल्याण वर्ष 2026” की औपचारिक शुरुआत की गई। सरकार ने साफ संदेश दिया—नीतियां अब मंत्रालयों से निकलकर सीधे खेतों तक पहुंचेंगी। इस विशेष कृषि कैबिनेट में निमाड़-मालवा क्षेत्र के लिए करीब 27 हजार करोड़ रुपये के पैकेज और विभिन्न विकास योजनाओं पर मुहर लगी।
बैठक में सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार, कृषि अधोसंरचना मजबूत करने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और फसल प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। साथ ही पर्यटन विकास, सड़क और पेयजल योजनाओं को भी प्राथमिकता दी गई, ताकि आदिवासी अंचल में समग्र विकास सुनिश्चित हो सके। बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में पहली बार कैबिनेट बैठक आयोजित होना अपने आप में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इससे यह संदेश गया कि सरकार विकास को लेकर क्षेत्रीय संतुलन पर गंभीर है और दूरस्थ आदिवासी इलाकों को मुख्यधारा में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि कृषि आधारित उद्योगों और वैल्यू एडिशन पर जोर दिया जाएगा। खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने की दिशा में यह बैठक मील का पत्थर साबित होगी। नागलवाड़ी से उठी यह पहल केवल एक बैठक नहीं, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी भारत के सशक्तिकरण का संदेश है—जहां सरकार खुद किसानों के द्वार पहुंची और विकास का रोडमैप वहीं से तैयार किया।