Sagar- बुंदेली लोकनृत्य राई ने बांधा समां, राष्ट्रीय नाट्य समारोह में शानदार प्रस्तुति
सागर यूनिवर्सिटी में नाट्य समारोह के तीसरे दिन के पहले सत्र में बुंदेली अंचल की सांस्कृतिक पहचान ‘राई’ और ‘स्वांग’ की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में समा बाँध दिया,सागर के विख्यात राई कलाकार एवं पद्मश्री स्वर्गीय रामसहाय पाण्डेय के सुपुत्र संतोष पाण्डेय की टीम ने लोकनृत्य ‘राई’ की प्रभावशाली प्रस्तुति दी। प्रस्तुति में पारंपरिक वेशभूषा, लोकसंगीत और जीवंत अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया । कार्यक्रम के उपरांत पद्मश्री स्वर्गीय राम सहाय पांडेय के बेटे संतोष पांडेय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कोई भी कला निम्न नहीं होती, हर कला समाज की धरोहर होती है। उन्होंने राई लोकनृत्य की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज के वंचित वर्गों ने हमारी संस्कृति को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसके लिए हम सभी को उनका आभार व्यक्त करना चाहिए। उन्होंने संस्कृति संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि लोकनृत्य ‘राई’ केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की सामाजिक चेतना और लोकजीवन की अभिव्यक्ति है। इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि सदियों पुरानी है और यह ग्रामीण जीवन, उत्सवों तथा सामाजिक परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि ‘स्वांग’ लोकनाट्य की एक सशक्त विधा है, जिसकी प्रस्तुति शैली संवाद, गीत और अभिनय के माध्यम से समाज को संदेश देती रही है। बदलते समय में भी इन लोक विधाओं की प्रासंगिकता बनी हुई है, आवश्यकता है कि नई पीढ़ी इन्हें समझे और संरक्षित करे। गोरखपुर से आए नाट्य कलाकारों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए लोकनृत्य और नाट्य प्रस्तुति को समृद्ध किया। डॉ. राकेश सोनी ने राई लोकनृत्य एवं स्वांग के विषय के बारे विस्तार से बताया. डॉ. नीरज उपाध्याय ने बुन्देली लोक नाट्य और लोक नृत्य के संक्षिप्त इतिहास और उसकी समृद्ध परम्परा के बारे में जानकारी देते हुए कार्यक्रम का संचालन और संयोजन किया