Sagar- मादाओं को रिझाने रंग बदलकर मुकाबला करते है नीलगाय, मुगलो के जैसी हरम व्यवस्था SAGAR TV NEWS
अक्सर आपने खेतो के आसपास नीलगाय जरुर देखे होंगे जो दिखाई तो घोड़े के जैसे देते है लेकिन आते मृग प्रजाति है से लेकिन लोगो के मन में इन्हे देखकर यह सवाल जरूर आता है की इनका रंग नीला तो होता नहीं फिर नील गाय क्यों कहा जाता है आज की इस स्टोरी में हम इन्ही सवालों को खोजने की कोशिश करेंगे, दरअसल सागर के नौरादेही टाईगर रिजर्व से दो नीलगायों के लड़ते हुए दुर्लभ वीडियो सामने आये है, लेकिन यह लड़ाई क्यों कर रहे है शायद यह भी आपके मन में सवाल हो सकता है, अक्सर आपने मुगलकाल की व्यवस्था के समय हरम शब्द का जिक्र सुना होगा, आमतौर पर माना जाता है कि हरम एक ऐसी वर्जित जगह होती है,
जहां एक राजा या पुरूष से जुड़ी स्त्रियां रहती हैं और वहां दूसरे पुरूषों का जाना मना होता है. लेकिन अगर ये शब्द किसी जंगल के जानवर की सामाजिक या सामुदायिक संरचना में सुनने मिले, तो विश्वास करना मुश्किल होगा. लेकिन नीलगायों के समुदाय में नर और मादा नीलगायों के बीच प्रजनन से जुड़ी क्रियाओं को लेकर हरम शब्द का उपयोग किया जाता है. नर नीलगायों के बीच आपस में लड़ाई होती है और जो जीत जाता है, वह मादा नीलगायों के समूह के साथ रहता है. नौरादेही टाइगर रिजर्व में ऐसा ही वीडियो सामने आया है, जिसमें 2 नर नीलगाय आपस में लड़कर अपने आप को ताकतवर साबित कर मादा नीलगायों को रिझाने की कोशिश कर रहे हैं.
इसको लेकर नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए यह भी बताया की नीलगाय में केवल नर नीलगाय ही हल्का नीला होता है मादा का रंग हमेशा केमल कलर का होता है नर मेटिंग के समय चटक नीला काला होकर रंग बदलता है मेटिंग के बाद दोबारा हल्का नीला हो जाता है लेकिन जन्म के बाद वयस्क होने तक दोनों में अंतर् करना मुश्किल रहता है, यहां तक की पहले इन्हे रोजड़ा नाम से जाना जाता था लेकिन मुगल काल में इन्हे सरंक्षित करने शिकार से बचाने के लिए इसका नाम नीलगाय किया गया ताकि गाय शब्द जुड़ने से जुड़ने से लोग शिकार करना बंद कर दे