Sagar- तीन बत्ती पर बुंदेलखंड राज्य की हुंकार ! चित्रकूट से ओरछा तक जन आक्रोश रथ यात्रा
बुंदेलखंड राज्य निर्माण की मांग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। 16 फरवरी से 13 मार्च 2026 तक अखण्ड बुंदेलखंड में जन आक्रोश रथ यात्रा निकाली जा रही है। यह यात्रा वनवासी राम की नगरी चित्रकूट से शुरू होकर रामराजा सरकार की पावन स्थली ओरछा में समापन करेगी। यात्रा का शुभारंभ कामतानाथ मंदिर से हुआ, जहां से रथ बांदा, पन्ना, दमोह, सागर, टीकमगढ़, ललितपुर, दतिया, जालौन, हमीरपुर, महोबा, छतरपुर, निवाड़ी और झांसी होते हुए ओरछा धाम पहुंचेगा।
यात्रा में शामिल बुंदेली योद्धाओं ने कफन बांधते हुए ऐलान किया—“याचना नहीं, अब रण होगा, संग्राम बड़ा भीषण होगा।” उनका कहना है कि बुंदेलखंड राज्य निर्माण का संघर्ष अब आर-पार की लड़ाई बनेगा। जो जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर चुप हैं, उनके “असली चेहरे” जनता के सामने लाए जाएंगे। मोर्चा अध्यक्ष भानू सहाय ने दावा किया कि इस आंदोलन के दौरान एक लाख संघर्षशील कार्यकर्ताओं को गांव-गांव जोड़ा जाएगा। नेताओं की चुप्पी के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलाने और जनदबाव बनाने की रणनीति भी सामने आई है।
सागर जिले में प्रवेश पर ग्रामीणों ने यात्रा का स्वागत किया। लोगों ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को सामूहिक पत्र लिखने की बात कही। गढ़ा कोटा बस स्टैंड और सागर कचहरी में पर्चे बांटे गए, जहां अधिवक्ताओं ने भी समर्थन जताया। शाम को सागर के तीन बत्ती चौराहे पर मशाल जुलूस निकाला गया। “बुंदेलखंड तो लेंगे, जैसे दोगे वैसे लेंगे” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। आयोजकों का कहना है कि जब देश के अन्य क्षेत्रों को उनकी भाषा और पहचान के आधार पर राज्य मिला, तो बुंदेली भाषियों को क्यों नहीं? अब यह यात्रा टीकमगढ़ होते हुए उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में प्रवेश करेगी। सवाल यही है—क्या यह जनआक्रोश राजनीतिक समीकरण बदल पाएगा, या फिर यह संघर्ष और तेज होगा?