परीक्षा पड़ाव है, मंज़िल नहीं, बोर्ड एग्जाम से पहले सीएम मोहन यादव का बड़ा संवाद, छात्रों में भरा नया आत्मविश्वास
बोर्ड परीक्षा के ठीक पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव केवल मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि एक अभिभावक, मार्गदर्शक और प्रेरक के रूप में सामने आए। भोपाल के एक शासकीय विद्यालय में आयोजित ऐतिहासिक ‘परीक्षा पर संवाद’ कार्यक्रम में उन्होंने छात्रों के बीच पहुंचकर न सिर्फ उनकी बात सुनी, बल्कि उनके मन से परीक्षा का डर निकालने का आत्मविश्वास भरा मंत्र भी दिया। यह संवाद महज औपचारिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और प्रेरणादायक था, जिसने हजारों छात्रों के मनोबल को नई ऊर्जा दी।
सीएम डॉ. मोहन यादव ने छात्रों से सीधा संवाद करते हुए कहा, परीक्षा जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि एक पड़ाव मात्र है। डरकर नहीं, डटकर आगे बढ़ें। उन्होंने जोर देकर कहा कि सफलता का असली सूत्र है—लक्ष्य पर फोकस, निरंतर मेहनत और सकारात्मक सोच। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे तनाव से दूर रहें, संतुलित दिनचर्या अपनाएं, पर्याप्त नींद लें और समय प्रबंधन के साथ नियमित अभ्यास करें।
कार्यक्रम के दौरान कई छात्रों ने अपनी शंकाएं खुलकर रखीं—किसी को परीक्षा का डर था, तो किसी को असफलता का भय। मुख्यमंत्री ने हर सवाल का सरल, सहज और व्यवहारिक जवाब दिया, जिससे छात्र सहज महसूस कर रहे थे। उनका आत्मीय अंदाज देखकर ऐसा लगा मानो कोई शिक्षक नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार अभिभावक उन्हें राह दिखा रहा हो।
यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बोर्ड परीक्षाओं के दबाव में लाखों छात्र मानसिक तनाव से गुजरते हैं। मुख्यमंत्री का यह संवाद न केवल विद्यार्थियों को मानसिक मजबूती देगा, बल्कि उन्हें बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित भी करेगा। शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे छात्रों के लिए बेहद सकारात्मक कदम बताया है।
मुख्यमंत्री की यह संवेदनशील पहल साफ दर्शाती है कि मध्य प्रदेश में शिक्षा सिर्फ नीति का विषय नहीं, बल्कि भविष्य निर्माण की प्राथमिकता है। ‘परीक्षा पर संवाद’ जैसे कार्यक्रम आने वाले समय में विद्यार्थियों के लिए नई प्रेरणा और मार्गदर्शन का मजबूत आधार बनेंगे।