स्कूली बच्चों का भविष्य खतरे में, मनमर्जी से स्कूल आते हैं शिक्षक,बच्चे खुद करते हैं काम !
स्कूली बच्चों का भविष्य खतरे में, मनमर्जी से स्कूल आते हैं शिक्षक,बच्चे खुद करते हैं काम !
अगर ये कहा जाए की सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य खतरे में है या ये कहा जाए की बच्चों का भविष्य अंधकाररमय है तो शायद कहना भी गलत नहीं होगा। क्योंकि लगातार सरकारी स्कूलों से इसी तरह की तस्वीरें सामने आती रहती हैं। ताजा मामला दमोह जिले की सरकारी स्कूल का है। जहां शिक्षकों की मनमर्ज़ियों के चलते बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है तो ग्रामीण भी इससे खासे परेशान हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है की स्कूल में पदस्थ शिक्षक कभी भी समय से स्कूल नहीं पहुंचते हैं। दमोह जिले के एलौरा सलैया गांव में संचालित सरकारी मिडिल स्कूल में काफी अनियमिताएं सामने आयी। यहां छात्र- छात्राएं पढ़ाई के लिए तो समय से पहुंच जाते हैं। लेकिन शिक्षक यहां अपनी मर्जी से ही आते हैं। जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके अलावा स्कूल के बच्चे खुद ही सारा काम करते हैं।
यहां-वहां मवेशी बैठे हुए हैं। आस-पास गंदगी फैली हुई है। हद तो ये है की बच्चों को पीने के लिए गंदा पानी नसीब होता है उसे भी वह खुद ही भरकर ले जाते हैं। ग्रामीणों ने इसको लेकर जिम्मेदार अधिकारीयों को भी कई बार अवगत कराया। लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है की उनके गांव के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। लेकिन शिक्षकों को उससे कोई मतलब नहीं है। वह अपने मन मुताबिक स्कूल पहुंचते हैं। और जब मन किया पढ़ा दिया नहीं तो स्कूल के पास ही दुकान पर बैठे रहते हैं। शिक्षक वीरेंद्र चौबे जो जन शिक्षक हैं। उन्हें स्कूल में तीन दिन पढ़ाई के लिए पहुंचना चाहिए, लेकिन आरोप है की वह महीने में कभी-कभार ही स्कूल आते हैं।
वहीं दूसरी तरफ इस स्कूल में पर्याप्त स्टाफ न होने की बात भी सामने आई है। जिस वजह से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
जब इस पूरे मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी एस.के. नेमा से फोन पर संपर्क किया गया, तो उनका कहना था कि आपके द्वारा मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच जल्द ही करवाते हैं। साथ ही मध्यान्ह भोजन और पानी की स्वच्छता को लेकर भी जांच करवाएंगे।
अब देखने वाली बात होती है की आखिर इस स्कूल में फैली अव्यवस्थाएं कब तक दूर होती हैं। अधिकारी इस ओर कितना ध्यान देते हैं। या फिर बच्चों के भविष्य के साथ यूं ही खिलवाड़ होता रहेगा।-