Sagar - देवलचौरी की 121 साल पुरानी रामलीला में धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर ने बांधा समां, हजारों दर्शक बने साक्षी
सागर के देवलचौरी गांव में चल रही ऐतिहासिक रामलीला के गुरुवार के मंचन ने दर्शकों को त्रेता युग में पहुंचा दिया। दर्शकों से खचाखच भरे रामघाट पर जैसे ही शिव धनुष टूटा, पूरा वातावरण तालियों की गड़गड़ाहट और जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर और लक्ष्मण परशुराम संवाद ने रामलीला को यादगार बना दिया।
गुरुवार दोपहर करीब 3:30 बजे देवलचौरी गांव का रामघाट पूरी तरह दर्शकों से भर चुका था। हर निगाह मंच की ओर टिकी थी। पर्दा उठते ही मंच पर राजा जनक का भव्य दरबार सजा दिखाई दिया। दरबार के बीचों-बीच भगवान शिव का दिव्य धनुष पिनाक विराजमान था। देश-देशांतर से आए राजाओं से भरे दरबार में राजा जनक ने अपना प्रण सुनाया कि जो इस धनुष को उठाकर तोड़ेगा, वही सीता का वर बनेगा
शाम 4:20 बजे मंच पर रावण और बाणासुर की दमदार एंट्री ने माहौल को जोश से भर दिया। रामलीला में धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर का दृश्य देखते ही बन रहा था। महर्षि विश्वामित्र राम और लक्ष्मण के साथ स्वयंवर में पहुंचे। एक-एक कर सभी राजा शिव धनुष को उठाने का प्रयास करते रहे, लेकिन कोई भी सफल नहीं हुआ। रावण-बाणासुर के बीच हुए संवाद दर्शकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र रहे, जब सभी राजा असफल हो गए तो महर्षि विश्वामित्र ने राम से कहा- उठहु राम भंजहु भव चापू। मेटहु तात जनक परितापू।
गुरु की आज्ञा पाकर भगवान राम ने शिव धनुष उठाया और क्षणभर में उसे तोड़ दिया। धनुष टूटते ही रामघाट जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद मंच पर भगवान परशुराम का क्रोधपूर्ण आगमन हुआ। उन्होंने शब्दों के तीखे बाणों से राजाओं को ललकारा। लक्ष्मण और परशुराम के बीच हुए जोशीले संवाद ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लक्ष्मण बने शुभ सिरोठिया और परशुराम बने भारतभूषण तिवारी के अभिनय की खूब सराहना हुई। राम की भूमिका में आयुष दुबे ने सशक्त अभिनय किया।
रामलीला की शुरुआत 121 वर्ष पहले बब्बाजी मालगुजार छोटेलाल तिवारी ने की थी, जिसे आज भी पूरा गांव मिलकर श्रद्धा से आगे बढ़ा रहा है।