एक और मौत अब तक 30 मौतें, शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन; हाईकोर्ट ने दिए स्वतंत्र जांच के आदेश
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैले डायरिया का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। डायरिया से पीड़ित एक और बुजुर्ग की जान जाने के बाद इलाके में आक्रोश फूट पड़ा। मृतक की पहचान 62 वर्षीय खूबचंद बंधोनियां पिता गन्नूदास के रूप में हुई है। परिजनों का आरोप है कि दूषित पानी के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी थी और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इस जान जाने के बाद स्थानीय लोगों ने अब तक 30 मौतें होने का दावा किया है।
खूबचंद की जान जाने के बाद परिजन और स्थानीय नागरिकों का गुस्सा सड़कों पर नजर आया। आक्रोशित लोगों ने भागीरथपुरा चौक पर शव रखकर जोरदार प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। परिजनों का कहना है कि मृतक ने दो बार नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज कराया था, लेकिन समय पर सही उपचार और साफ पानी की व्यवस्था नहीं होने से उनकी जान चली गई। प्रदर्शनकारियों ने इलाके में तत्काल शुद्ध पेयजल सप्लाई, दोषियों पर कार्रवाई और मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग की।
इधर, दूषित पानी से हो रही मौतों के मामले ने न्यायिक स्तर पर भी गंभीर रूप ले लिया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में इस मामले की करीब ढाई घंटे तक सुनवाई हुई। कोर्ट के सामने 23 मौतों की रिपोर्ट पेश की गई, जिनमें से 16 मौतों को दूषित पानी से जोड़कर देखा गया है। चार मामलों में स्थिति स्पष्ट नहीं बताई गई, जबकि तीन मौतों को दूषित पानी से संबंधित नहीं माना गया।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त रुख अपनाया और स्वतंत्र जांच के आदेश दिए। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना राज्य की जिम्मेदारी है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अहम हिस्सा है। साथ ही, कोर्ट ने रोजाना जल गुणवत्ता की जांच, नियमित स्वास्थ्य शिविर जारी रखने और चार सप्ताह के भीतर अंतरिम रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 5 मार्च 2026 को होगी। लगातार बढ़ती मौतों और कोर्ट की सख्ती के बीच अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।