MP में कहर बनकर बरसे ओले, गेहूं-चना बर्बाद, किसानों की चिंता बढ़ी; विधायक महेश परमार ने CM को लिखा पत्र
MP में कहर बनकर बरसे ओले, गेहूं-चना बर्बाद, किसानों की चिंता बढ़ी; विधायक महेश परमार ने CM को लिखा पत्र
एमपी के उज्जैन जिले की तराना तहसील में बेमौसम बारिश और भारी ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। नाहरखेड़ी सहित आसपास के कई गांवों में अचानक बदले मौसम ने गेहूं और चने की खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। खेतों में सफेद चादर की तरह जमे ओलों ने अन्नदाताओं के चेहरों पर फिर से चिंता की लकीरें खींच दी हैं। मंगलवार को दोपहर बाद अचानक तेज बारिश के साथ ओले गिरने लगे। कुछ ही देर में खेतों में खड़ी फसलें जमीन पर बिछ गईं। किसानों के अनुसार, जिन फसलों की कटाई कुछ ही दिनों में शुरू होने वाली थी, वे पूरी तरह चौपट हो गई हैं। गेहूं की बालियां टूट गईं, जबकि चने की फसल को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है। कई किसानों का कहना है कि अब उनके सामने कर्ज और रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
ओलावृष्टि के बाद से गांवों में सन्नाटा पसरा हुआ है। किसान खेतों में जाकर नुकसान का आंकलन कर रहे हैं। पीड़ित किसानों ने शासन-प्रशासन से तत्काल सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते राहत नहीं मिली तो उनकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है। तराना विधायक महेश परमार ने ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के पक्ष में मोर्चा संभालते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। पत्र में विधायक ने उज्जैन जिले के तराना क्षेत्र में हुई भारी ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का उल्लेख करते हुए तत्काल फसल सर्वे, राहत राशि और फसल बीमा क्लेम दिलाने की मांग की है। विधायक ने कहा कि अन्नदाता पहले ही महंगाई और कर्ज से जूझ रहा है, ऐसे में प्राकृतिक आपदा ने उसकी कमर तोड़ दी है।
किसानों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द राजस्व और कृषि विभाग की टीमों को गांवों में भेजकर नुकसान का आकलन कराया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को समय पर मुआवजा और बीमा राशि मिल सके। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रकृति की मार से सबसे ज्यादा प्रभावित अन्नदाता ही होता है। अब सबकी निगाहें सरकार की ओर हैं कि किसानों को कितनी जल्दी राहत मिल पाती है।