काम कराया लेकिन भुगतान नहीं किया,हक़ मांगने कलेक्ट्रेट की चौखट पर डाला डेरा |SAGAR TV NEWS|
जिन हाथों में जंगल बचाने की जिम्मेदारी है। उन्हीं हाथों ने अब आदिवासी मजदूरों की मेहनत पर कुल्हाड़ी चला दी। शहडोल जिले से वन संवारने के नाम पर बुलाए गए करीब 70 आदिवासी मजदूरों को अपना हक़ मांगने कलेक्ट्रेट की चौखट पर डेरा डालना पड़ा। जी हाँ तस्वीरों में नज़र आने वाले इन लोगों से काम तो कराया गया लेकिन मेहनताना नहीं दिया गया। मामला शिवपुरी जिले की बदरवास तहसील से सामने आया। दरअसल मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से मजदूरों को लाकर गड्ढा खोदने और बाउंड्री वॉल का काम पिछले तीन महीने से कराया जा रहा था। लेकिन मजदूरों को उनका भुगतान नहीं किया गया। जिससे परेशान मजदूरों ने कलेक्ट्रेट पर डेरा डाल दिया। और कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर वन विभाग के डिप्टी रेंजर से भुगतान करने की गुहार लगाई।
मजदूर सपना का कहना है कि उनकी ठेकेदार ममता बाई हैं और उसके कहने पर वह शहडोल से शिवपुरी की बदरवास तहसील में आए। यहां गड्ढे खोदने के अलावा वन विभाग की बाउंड्री का काम भी किया। लेकिन डिप्टी रेंजर द्वारा महज ढाई लाख रुपए का ही भुगतान किया गया। जबकि मजदूरों को 13 लख रुपए से ज्यादा का भुगतान अभी भी डिप्टी रेंजर से लेना है। जब मजदूरों ने उनसे अपना भुगतान मांगा तो उन्होंने मना कर दिया और कहा कि जहां कहीं भी शिकायत करना है कर दो।
वहीं इस मामले को लेकर जब मीडियाकर्मी वन विभाग के आला अधिकारियों के पास पहुंचे तो वह कोई भी प्रतिक्रिया देने से बचते नजर आये।