Sagar - दुनिया से चला गया परिवार का मुखिया तब जागा प्रशासन, विधायक ने किया हस्तक्षेप
ये जो सरकारी सिस्टम है जो सरकारी तंत्र है आखिर यह देर से क्यों जागता है। ये तब क्यों जागता है जब देर हो चुकी होती है। हम सागर जिले के बंडा की बात कर रहे हैं जहां जमीनी विवाद में परेशान होने के बाद परिवार के मुखिया की जान चली गयी। प्रशासन की लापरवाही उजागर हुई। और अब विधायक वीरेंद्र सिंह लम्बरदार के हस्तक्षेपर करने के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया। दरअसल बण्डा-बरायठा रोड स्थित जमीन विवाद प्रकरण में एक पीड़ित की जान चली गयी। महीनों तक न्याय की गुहार लगाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने से तत्तु पटेल मानसिक प्रताड़ना झेल रहे थे, इसी बीच हृदय गति रुकने से उनकी जान चली गयी।
जानकारी के मुताबिक पटवारी हल्का नंबर 92 (वर्तमान 43) के खसरा नंबर 130/1 की भूमि पर आरोप है की दबंग राजेन्द्र जैन ने अवैध कब्जा कर लिया था। पीड़ित तत्तू पटेल ने तहसील, जनसुनवाई और कलेक्टर कार्यालय तक कई बार आवेदन दिए, फाइलें आगे नहीं बढ़ी। सीमांकन और कब्जा हटाने जैसी सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई भी समय पर नहीं की गई। लगातार अनदेखी और दबंगों के दवाब से तत्तू पटेल को मानसिक रूप से तोड़ दिया। जिससे असमय उनका निधन हो गया। हैरानी की बात ये है की तत्तू पटेल के पुत्र हेमंत पटेल का निधन भी एक साल पहले हो चुका है। अब पत्नी और पांच छोटी बेटियों के सामने जीवन यापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
मामले से आक्रोशित कुशवाहा समाज के अध्यक्ष कुंजबिहारी पटैल और युवा अध्यक्ष ओम पटैल के नेतृत्व में समाज के लोग बड़ी संख्या में पीड़ित परिवार के साथ विधायक वीरेन्द्र सिंह लम्बरदार के निवास पहुंचे। जहां उन्हें ज्ञापन सौंपते हुए प्रशासन को इसका जिम्मेदार ठहराया।
जिस पर बंडा विधायक ने तहसीलदार मोहित जैन से फोन पर चर्चा कर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। विधायक ने कहा कि किसी भी सूरत में गरीब और कमजोर के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। बड़ा सवाल ये है की आखिर प्रशासन इतनी देर बार हरकत में क्यों आया। ज़रुरु कारवाई पहले क्यों नहीं की गयी।
वहीं न्याय न मिलने पर कुशवाहा समाज ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।-