टारगेट की दौड़ में महिलाओं की जा न से खिलवाड़, बजाग नसबंदी शिविर में गंभीर लापरवाही
टारगेट की दौड़ में महिलाओं की जा न से खिलवाड़, बजाग नसबंदी शिविर में गंभीर लापरवाही
एमपी के डिंडौरी जिले के बजाग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित नसबंदी शिविर में स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई है। नसबंदी कराने पहुंची महिलाओं ने आरोप लगाया है कि टारगेट पूरा करने की जल्दबाजी में उनके साथ खिलवाड़ किया गया। ठंड के बीच घंटों इंतजार कराने के बाद कई महिलाओं को बिना नसबंदी किए ही वापस भेज दिया गया, जबकि कुछ महिलाओं को ऑपरेशन से पहले बेहोशी का इंजेक्शन तक लगा दिया गया था।
नसबंदी शिविर में शामिल होने आई महिलाओं का कहना है कि उन्हें सुबह से ही बजाग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बुला लिया गया था। पंजीयन कराने के बाद महिलाओं को ऑपरेशन की तैयारी के नाम पर लंबे समय तक बाहर बैठाए रखा गया। कड़कड़ाती ठंड में इंतजार के दौरान न तो बैठने की समुचित व्यवस्था थी और न ही स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा कोई स्पष्ट जानकारी दी गई। देर शाम अचानक स्टाफ ने यह कहकर महिलाओं को घर भेजना शुरू कर दिया कि नसबंदी का टारगेट पूरा हो चुका है।
महिलाओं के आरोप और भी गंभीर हैं। उनका कहना है कि कई महिलाओं को ऑपरेशन से पहले बेहोशी का इंजेक्शन लगा दिया गया था। इसके बाद अचानक कहा गया कि अब ऑपरेशन नहीं होगा और वे अपने-अपने घर चली जाएं। बेहोशी के इंजेक्शन के बाद न तो महिलाओं को ऑब्जर्वेशन में रखा गया और न ही किसी तरह की चिकित्सकीय निगरानी की गई। इस लापरवाही से महिलाओं की तबीयत बिगड़ने का खतरा बना रहा। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि इंजेक्शन देने के बाद न तो आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की गई और न ही कोई संतोषजनक इलाज या दवाइयां दी गईं। अचानक ऑपरेशन रद्द कर देना और बेहोशी की हालत में घर भेज देना स्वास्थ्य नियमों का खुला उल्लंघन है।
इस पूरे मामले के बाद स्वास्थ्य विभाग और नसबंदी शिविर में मौजूद डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। महिलाओं ने जिम्मेदार अधिकारियों और स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों ने चुप्पी साध रखी है, लेकिन मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन की भूमिका पर भी नजरें टिकी हुई हैं।