Sagar- नर्मदा जयंती पर 171 मीटर की चुनरी यात्रा, जानें क्यों दर्शन मात्र से ही हो जाता है पापों का नाश?
नर्मदा जयंती के पावन अवसर पर नर्मदा घाटों से लेकर छोटे छोटे गांव शहर तक में माहौल भक्तिमय सराबोर नजर आए. मान्यता है कि मां नर्मदा के पावन दर्शन करने पूजन अर्चन करने मात्र से सभी पापों का नाश हो जाता है. सागर में भी मां नर्मदा जयंती पर 171 मीटर की चुनरी यात्रा निकाली गई जो महाकाली मंदिर चमेली चौक से प्रारंभ हुई जो बड़ा बाजार, कोतवाली, तीन बत्ती से वापस चमेली चौक श्री देव डूठाबली हनुमान मंदिर प्रांगण मां नर्मदा धाम में सभी भक्तों द्वारा पूजन अर्चना कर चुनरी अर्पित की गई। महा आरती कर महाभोग एवं नर्मदा जल की बाटले कार्यक्रम के संयोजक संतोष सोनी मारुति के द्वारा वितरित की गई। चुनरी यात्रा में सैकड़ो महिलाएं पुरुष भक्तगण मां नर्मदा जी का जयकारा करते हुए जा रहे थे।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन समय में भगवान शिव मैखल पर्वत पर तपस्या कर रहे थे. उसी दौरान भोलेनाथ के पसीने से एक कन्या का जन्म हुआ. उस कन्या का नाम उन्होंने नर्मदा रखा. नर्मदा का अर्थ होता है सुख प्रदान करने वाली. इसके बाद भगवान शिव ने नर्मदा को आर्शीवाद दिया कि जो तुम्हारे दर्शन करेगा उसका कल्याण होगा और उसको पापों से मुक्ति मिल जाएगी.नर्मदा नदी को शंकर स्वरूपा और मैखल राज की पुत्री भी कहा जाता है. नर्मदा को मोक्षदायिनी कहा जाता है. प्राचीन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा में एक बार, यमुना में तीन बार और सरस्वती नदी में सात बार स्नान करने से जो लाभ होता है वह नर्मदा नदी का मात्र दर्शन करने से हो जाता है. नर्मदा नदी में स्नान करना भी बहुत लाभकारी माना जाता है. जो नर्मदा में स्नान करता है उसको शुभ फलों की प्राप्ति होती है.
कार्यक्रम में बद्री प्रसाद शुक्ला ,प्रदीप पप्पू गुप्ता, माखनलाल सोनी ,रवि सोनी ,नारायण गुप्ता, श्याम सुंदर सोनी, राजेश जड़िया, बबलू सोनी,सोमेस जड़िया, बृजेश सोनी, सीताराम तिवारी ,मुकेश जड़िया अनेकों भक्त शामिल हुए,
मां नर्मदा जयंती पर 171 मीटर की चुनरी यात्रा एवं महा आरती हुई : मां नर्मदा जयंती पर 171 मीटर की चुनरी यात्रा दोपहर 3:00 बजे