Sagar शादी के 18 साल बाद हुई छटवीं बेटी तो महिला पर टूट पड़ा परिवार, बेटे की चाह में पति बना
एक महिला की ज़िंदगी पर “बेटे की चाह” ने फिर एक बार जख्मों की तरह दस्तक दी है। 18 साल का वैवाहिक जीवन, छह बेटियां—और हर बेटी के जन्म के साथ बढ़ता ताना, बढ़ती प्रताड़ना… आखिरकार यह कहानी दर्दनाक हिंसा में बदल गई।
ये मामला सागर जिले के खुरई देहात थाना क्षेत्र के तेवरी गांव है, अस्पताल में भर्ती पीड़िता ज्योति अहिरवार का कहना है कि उसकी शादी को 18 साल हो चुके हैं। लेकिन घर में खुशियों की जगह हमेशा एक ही सवाल तैरता रहा—“बेटा कब होगा?” हर बार बेटी होने पर उसे ताने सुनने पड़े, अपमान सहना पड़ा। छह महीने पहले जब छठवीं बेटी का जन्म हुआ, तो ससुराल में तनाव और बढ़ गया। बात-बात पर झगड़े होने लगे, और ज्योति को अपनी ही देह और मन पर लगातार चोटें सहनी पड़ती रहीं—कभी शब्दों से, कभी व्यवहार से।
ज्योति ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले उसने नसबंदी का ऑपरेशन कराया था। उसके लिए यह फैसला अपनी सेहत, अपने बच्चों के भविष्य और लगातार बढ़ते मानसिक दबाव के बीच लिया गया कदम था। लेकिन यही कदम उसके लिए “सजा” बन गया। आरोप है कि पति राजेश, सास फूलाबाई और ससुर मुन्ना इस बात से बेहद नाराज थे। बुधवार शाम इसी पर विवाद हुआ
ज्योति के अनुसार, पति राजेश ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की। दर्द की हद तब टूट गई जब आरोप है कि मारपीट के दौरान उसने ऑपरेशन के टांकों वाली जगह पर ही चोट पहुंचाई—जहां एक महिला को सहारा चाहिए होता है, वहीं उसे सबसे ज्यादा दर्द दे दिया गया। घायल ज्योति को इलाज के लिए सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है,
यह मामला सिर्फ एक महिला की पिटाई नहीं—यह उस मानसिकता का आईना है, जहां बेटी को बोझ समझा जाता है और एक महिला के फैसले, उसकी सेहत और उसका सम्मान तक “बेटे की चाह” के नीचे कुचल दिए जाते हैं।