सागर में नंगे पांव भीख मांगते मासूम, सरकारी दावों पर सवाल ! प्रशासन बेखबर
सागर शहर के सिविल लाइन इलाके में इन दिनों छोटे छोटे बच्चे भीख मांगते दिख रहे है। ये सभी बच्चे 10 साल या उससे भी कम उम्र के है। इनकी संख्या करीब एक दर्जन बताई जा रही है। जहाँ एक तरफ भारत में बाल संरक्षण आयोग और बच्चों के कल्याण के लिए अन्य प्रावधान हैं, जो बच्चों को सुरक्षा, शिक्षा और पुनर्वास उपलब्ध करवाने के लिए बनाए गए हैं। वही दूसरी तरफ ये तस्वीरें पोल खोलती नजर आ रही है।
हाल ही में मध्य प्रदेश के कई जिलों में भीख माँगने और भीख देना दोनों पर रोक लगा दी गई है — जैसे इंदौर और भोपाल में सार्वजनिक स्थानों पर भीख माँगना और देना दोनों को प्रतिबंधित कर दिया गया है, और उल्लंघन पर एफआईआर व कानूनी कार्रवाई कि जाएगी। वही दूसरी तरफ सागर में ये बच्चे ठण्ड के मौसम में नंगे पैर भीख मांगते दिखाई दे रहे है। स्कूल जाने और पढाई लिखाई करने की उम्र में है उन्हें भीख मांगने क्यों मजबूर होना पढ़ रहा है ये बड़ा सवाल है जबकि सरकार अनाज, शिक्षा निशुल्क किये हुए है।
इन सभी योजाओं और शिक्षा का अधिकार, स्कूल चले जैसे अभियानों का जमकर प्रचार किया जाता है लेकिन इसकी जमीनी हकीकत देखनी हो तो कलेक्टर एसपी ऑफिस के नाक के निचे सागर के सिविल लाइन में देखी जा सकती है। जनपद मार्किट कालीचरण चौराहा, सिविल लाइन ट्रैफिक सिग्नल सभी जगह दर्जन भर से भी ज्यादा बच्चे भीख मांगते दिख जायेंगे।
इंदौर में शुरू हुए भीख-मुक्त अभियान के तहत भीख माँगने वाले लोगों की पहचान, FIR और पुनर्वास केंद्रों के ज़रिये काम किया गया है, और यह मॉडल मध्य प्रदेश के अन्य शहरों में भी अपनाया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि सागर में कब तक इन मासूम बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए कोई सार्थक और ठोस कदम उठाया जाता है।