Sagar- नौरादेही में नया सुल्तान, मिला साम्राज्य, पिंजरा खुलते ही गुर्राया फिर सरपट भागा
मध्य प्रदेश के सबसे बड़े वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में साल 2018 के बाद पहली दफा किसी दूसरे टाइगर रिजर्व से बाघ को पुनर्स्थापित किया गया है। कान्हा टाइगर रिजर्व से तड़के 3 साल के युवा टाइगर को लाया गया था। उसे अल सुबह अंधेरे में ही जंगल में रिलीज किया गया। पिंजरा खुलते ही बाघ ने छलांग मारी और पिंजरे से बाहर आ गया। चंद सेकंड में बाघ सरपट जंगल में आंखों से ओझल हो गया। इस खुले इलाके में वह अपना साम्राज्य (टेरिटरी) स्थापित करेगा।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर ए ए अंसारी ने बताया कि नए टाइगर को मोहली के आंखीखेड़ा गांव में छोड़ा गया है। यहां से गांवों का विस्थापन किया गया था। यहां बाघों की संख्या काफी कम है, इसलिए नया टाइगर सुरक्षित व आराम से अपनी टेरिटरी स्थापित कर सकेगा। उसके शिकार के लिहाज से यहां शाकाहारी वन्य प्राणियों संख्या भी पर्याप्त हैं। रेडियो कॉलर आईडी से उस पर नजर भी रखी जाएगी
नौरादेही में जो कान्हा से नर टाइगर शिफ्ट किया गया है, उसका जीवन किसी फिल्मी कहानी की तरह है। रिकॉर्ड के अनुसार करीब 3 साल पहले सिवनी के पेंच टाइगर रिजर्व के रूखड़ वन परिक्षेत्र इलाके में वह मिला था। उस समय उसकी उम्र 3 से चार महीने की थी। वह अपनी मां से बिछड़ गया था। रेस्क्यू के बाद उसे पिंजरे में रखा गया था। कुछ समय बाद उसे कान्हा टाइगर रिजर्व के बाड़े में शिफ्ट किया गया था। यहां विशेषज्ञों की देखरेख में उसका जीवन बच सका।
शावक टाइगर को भोजन से लेकर जंगल की दुनिया का पूरा प्रशिक्षण दिया गया था। कान्हा टाइगर रिज़र्व के मुक्की स्थित घोरेला रिवाइल्डिंग बाड़ा में पालन-पोषण कर प्राकृतिक शिकार एवं स्वतंत्र विचरण के लिए प्रशिक्षित किया गया। वर्तमान में बाघ की उम्र लगभग 3 साल है। वह पूर्णतः स्वस्थ एवं जंगल में स्वतंत्र जीवन के लिए सक्षम है।