माँ ने चूड़ियां बेचकर पढ़ाया,मामा बने ढाल अब बेटा CISF जवान बनकर करेगा देश की रक्षा
तू न थकेगा कभी, तू न रुकेगा कभी, तू न मुड़ेगा कभी, कर शपथ, कर शपथ, कर शपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।....महान कवि हरिवंशराय बच्चन की लिखी हुई ये लाइनें हैं। कुछ इसी तरह का काम एमपी के छतरपुर जिले में रहने वाले एक युवक ने भी किया है। जो अब CISF जवान बनकर देश की रक्षा करेगा।
जी हां ये उस मां के बेटे की कहानी है जो बाज़ार में चूड़ियां बेचती है। जिसका बेटा देश की रखवाली करेगा।
कहते हैं न की अगर जोश,जुनून और हौसला हो तो फिर मंज़िल मिल ही जाती है। छतरपुर जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर भगवां नगर के एक छोटे से गांव से निकलकर अनिकेत साहू ने SSC GD परीक्षा में CISF पद पर चयनित होकर यह बात सच साबित कर दिखाई है। यह सफलता सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि संघर्ष,त्याग और माँ की तपस्या की जीत है। अनिकेत के पिता शोभाराम साहू मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं।
जिस कारण परिवार का कोई सहारा नहीं था। पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी अनिकेत की माँ के कंधों पर थी जो बाज़ारों में मनिहारी और चूड़ियों की छोटी सी दुकान लगाकर बच्चों का पेट पालती रहीं और पढ़ाई का खर्च उठाती रहीं। उन्होंने हालात से समझौता नहीं किया, बल्कि चुनौती की तरह स्वीकार किया। वह रोज़ बाजारों में मनिहारी और चूड़ियों की छोटी-सी दुकान लगाकर अपने बच्चों का पेट पालती रहीं,उनकी पढ़ाई का खर्च उठाती रहीं और हर दिन यह दुआ करती रहीं कि उनके बच्चे वह जीवन न जिएँ, जो उन्हें जीना पड़ा।
बचपन से ही पढ़ने में होशियार अनिकेत का सपना हमेशा से ही कुछ कर गुजरने था। आर्थिक हालत खराब होने से पढ़ाई छूटने के डर था, लेकिन उम्मीद नहीं हारी। मुश्किल वक़्त में अनिकेत के मामा ने हौसले की ढाल बनकर साथ दिया। उन्होंने कहा तुम सिर्फ मेहनत करो खर्च की चिंता मत करो। मामा ने पढ़ाई और तैयारी का पूरा जिम्मा उठाया। यहीं से उम्मीदों में पंख लग गए। वह पूरी निष्ठा से तैयारी में जुट गया।
न दिन देखा,न रात। पढ़ाई,दौड़, फिजिकल और लिखित परीक्षा हर स्तर पर उन्होंने खुद को झोंक दिया। कई प्रतियोगी परीक्षाएं दीं। लिखित में सफल हुए, लेकिन कहीं मेडिकल में बाहर हो गए,तो कहीं फिजिकल और दौड़ में असफलता हाथ लगी। लेकिन हारने के बजाय खुद को और मजबूत किया। अनिकेत ने खुद से एक ही सवाल किया अगर अभी रुक गया, तो माँ की मेहनत का क्या। खुद को और मजबूत किया और आखिर वह दिन भी आया जिसका इंतजार था।
जब SSC GD का फाइनल रिजल्ट घोषित हुआ और अनिकेत साहू ने अपना नाम चयन सूची में देखा, तो वह फूला नहीं समाया। आँखों से खुशी के आँसू बह निकले।माँ की आंखों में भी आंसू छलक आये। जिस माँ ने चूड़ियाँ बेच-बेचकर बेटे के सपनों को जिंदा रखा। आज उसी बेटे ने उसे देश की सेवा की वर्दी का सम्मान लौटा दिया। यही नहीं पूरा भगवां नगर भी खुशी से झूम उठा, पटाखे फोड़े गए,मिठाइयां बांटी गई और बधाई दी गयी। इस उपलब्धि पर स्कूल के प्राचार्य सुनील कुमार जैन , जीवन लाल जैन और थाना प्रभारी कृपाल सिंह मार्को समेत पूरे स्टाफ ने फूल-मालाएँ पहनाकर सम्मानित किया।-------- अनिकेत की सफलता बताती है कि हालात चाहे कैसे भी हों कभी हार नहीं माननी चाहिए।