बिना नींद लिए 50 सालों से स्वस्थ, रिटायर्ड अधिकारी की अजब-गजब कहानी
बिना नींद लिए 50 सालों से स्वस्थ, रिटायर्ड अधिकारी की अजब-गजब कहानी
क्या आप इस बात की कल्पना कर सकते हैं की कोई इंसान बिना सोए हुए भी रह सकता है। शायद नामुमकिन है। कहा जाता है की नींद के बिना ज़्यादातर लोग 10-12 दिन से ज़्यादा जीवित नहीं रह पाते। हालांकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति की स्थिति और स्वास्थ्य क्या है। कहा जाता है की अगर कोई व्यक्ति लगातार 11 दिन तक बिल्कुल न सोए, तो उसकी जान जा सकती है। लेकिन एमपी के रीवा जिले में रहने वाले एक शख्स ऐसे भी हैं। जो 50 साल से बिना नींद के भी स्वस्थ हैं। जी हां सुनकर ताज्जुब ज़रूर हुआ होगा, और हो भी क्यों न, क्योंकि बड़ी आश्चर्यजनक बात है।
तस्वीरों में नज़र आने वाले यह रीवा के रहने वाले रिटायर्ड ज्वॉइंट कलेक्टर मोहन लाल द्विवेदी हैं। वैसे कहा तो यही जाता है की बिना नींद के ज़िंदगी संभव नहीं। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नींद सबसे ज़रूरी मानी जाती है। लेकिन मोहन द्विवेदी के इस अनोखे मामले ने डॉक्टरों को भी हैरानी में डाल दिया है।
उनकी उम्र करीब 75 साल है। मोहन लाल कहते हैं। की उन्होंने आख़िरी बार इमरजेंसी के दौर में चैन की नींद ली थी, उसके बाद से आज तक उन्हें नींद ही नसीब नहीं हुई। उनकी पलकें तो बंद होती हैं, लेकिन आंखों में नींद नहीं आती। न झपकी, न गहरी नींद… पिछले 50 सालों से उनकी आंखों से नींद जैसे गायब हो चुकी है।
सबसे हैरानी की बात ये है की नींद न लेने के बावजूद मोहन लाल पूरी तरह स्वस्थ हैं। बताते हैं की उन्हें न थकान है, न कमजोरी, न मांसपेशियों में दर्द होता है। वह एक ही मुद्रा में घंटों बैठ सकते हैं साथ ही लंबे समय तक लगातार काम कर सकते हैं। मोहन लाल द्विवेदी के।मुताबिक उन्हें नींद आती ही नहीं है। रात को लेट तो जाते हैं, लेकिन नींद नहीं आती। किताबें पढ़ता हैं टहलता रहते हैं। अब यही दिनचर्या बन गई है।
उनका यह भी भी कहना है की नौकरी के दौरान उनके अधीनस्थ कर्मचारी उनके साथ काम करने से घबराते थे, क्योंकि मोहन लाल लगातार कई-कई घंटों तक बिना रुके काम करते थे। कई किलोमीटर पैदल चलते थे, लेकिन उन्हें थकान महसूस नहीं होती थी। हालांकि इस समस्या को लेकर उन्होंने देश के कई बड़े डॉक्टरों को भी दिखाया, जो भी संभव कार्य किया जा सकता था वह सब किया, दिल्ली, मुंबई के डॉक्टरों की सलाह ली, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। अब यह सब आदत में शुमार हो गया है।--------