Sagar- कलेक्टर बंगला के सामने लाखों रूपये लुटा रहा ये व्यापारी, कहानी जानकर हैरान रह जायँगे
Anchor सागर में एक ऐसे व्यापारी हैं, जिनकी उम्र भले ही 60 पार हो चुकी हो…लेकिन दिल आज भी बचपन का है। जहां आज के दौर में बच्चे मोबाइल और गेमिंग में उलझे हैं,वहीं ये शख्स बच्चों को मैदान तक खींच लाते हैं…और सिर्फ खेल नहीं खिलाते, बल्कि खेलने के बदले उन्हें पॉकेट मनी भी देते हैं। पिछले 25 सालों से हर रोज़ डेढ़ से दो हजार रुपए ये शख्स बच्चों पर खर्च कर रहा है…क्योंकि उनका अपना बचपन जिम्मेदारियों में बीत गया था।
कौन हैं ये शख्स, और क्यों हर शाम सागर के मैदान में बच्चों की भीड़ लग जाती है— देखिए हमारी खास रिपोर्ट
vo- सागर के भाग्योदय क्षेत्र, विद्यासागर कॉलोनी में रहने वाले सीमेंट व्यापारी सुभाष जैन आज शहर में बच्चों के “क्रिकेट अंकल” के नाम से पहचाने जाते हैं। सुभाष जैन बताते हैं कि महज़ 10 साल की उम्र में पिता का निधन हो गया था। इसके बाद खेल-कूद और बचपन की मस्ती छोड़ उन्हें दुकान और परिवार की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी। करीब 30 साल तक अटूट मेहनत करने के बाद जब आर्थिक स्थिति संभली,तो उन्होंने ठान लिया—जो बचपन छूट गया था, उसे अब बच्चों के साथ जीएंगे।
vo-2 सुभास जैन बताते है की बच्चों को फील्डिंग, स्टंपिंग, बॉलिंग, आउट करने वाले बच्चों को अलग-अलग पैसे देते हैं. यह काम सन 2000 से चल रहा है. 20 साल तक रेलवे स्टेशन के पास ग्राउंड में खेलते थे, लेकिन वहां पाइप लाइन डलने से दिक्कत आ जाने के बाद कलेक्टर बंगला के सामने 2020 से गौर ग्राउंड में आ गए हैं. कोई भी बच्चा आ जाए, कहीं से भी आ जाए, साथ में खेलते हैं. एक घंटे फील्डिंग करने के लिए 30 रुपये, एक से ज्यादा कैच लिया तो हर कैच का 5 रुपये, बॉलिंग करने वालों को 50 रुपए, कोई बोल्ड आउट करता है तो 50 रूपये उसके जुड़ जाते हैं, स्टंपिंग करने वाले को 40 रुपये देते हैं. इस तरह से रोजाना 1200 से 1500 रुपए क्रिकेट खेलने वाले बच्चों को बांटते हैं. जो महीने का 40-50 हजार साल का, 5-6 लाख हो जाता है, वे अब तक 25 सालों में इसी तरह एक करोड़ से अधिक पैसे लुटा चुके है,
सुभाष जैन केवल क्रिकेट के मैदान में ही पैसे नहीं देते, बल्कि गरीब और आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों की भी भरपूर मदद करते हैं. कई बच्चों की फीस भरी है, कई युवाओं की सहायता करके रोजगार से जोड़ा है, उनके द्वारा तैयार किए गए बच्चे आर्मी में भी सेलेक्ट हुए हैं. सुभाष ने बताया, जो बच्चा पढ़ना चाहता है, उसको किताबों में या फीस भरने में मदद करते हैं. अन्य किसी तरह की परेशानी होती तो भी उसके साथ खड़े रहते है,
Anchor-सुभाष जैन जैसे लोग ये साबित करते हैं कि बचपन सिर्फ उम्र से नहीं, जज़्बे से जिया जाता है आज जब समाज को सही दिशा की जरूरत है, तब सागर का ये व्यापारी मैदान के जरिए बच्चों का भविष्य गढ़ रहा है।