Sagar-चर्चित चौरसिया ह त्या कां ड में बड़ा फैसला, मुख्य आरोपी को उम्रकैद, इंजीनियर समेत 6 आरोपी बरी
सागर शहर के बहुचर्चित चौरसिया मर्डर कांड में जिला न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सीमेंट व्यापारी ब्रजेश चौरसिया और उनकी बेटी महिमा चौरसिया की गोली मारकर मर्डर करने वाले के मामले में मुख्य आरोपी रंजन उर्फ बब्बू राय निवासी पटना बिहार को अदालत ने आजीवन कारावास और ₹2000 के अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं, मामले में नामजद शहर के चर्चित इंजीनियर राजेश मिश्रा सहित 6 अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया है। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश प्रशांत सक्सेना की अदालत ने सुनाया। शासन की ओर से मामले की प्रभावी पैरवी अपर लोक अभियोजक दीपक जैन ने की।
अभियोजन के अनुसार, 17 जुलाई 2019 की रात करीब 2 बजे आरटीओ कार्यालय के पास खड़ी एक सेंट्रो कार में दो लोगों को गोली लगी हालत में देखा गया था। सूचना मिलने पर सिविल लाइन पुलिस मौके पर पहुंची, जहां कार की ड्राइवर सीट पर ब्रजेश चौरसिया गंभीर रूप से घायल मिले, बगल की सीट पर उनकी बेटी महिमा चौरसिया मृत अवस्था में थी, जबकि पीछे की सीट पर उनकी पत्नी राधा चौरसिया जीवित बैठी मिलीं। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने ब्रजेश और महिमा को मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जांच में मामला अजीब प्रतीत हुआ, लेकिन बाद में नोट, डिजिटल साक्ष्य और अन्य तथ्यों के आधार पर यह साफ हुआ कि यह सुपारी देकर कराई गई मर्डर का मामला है।
मर्ग जांच के बाद पुलिस ने रंजन उर्फ बब्बू राय सहित कुल 7 आरोपियों के खिलाफ धारा 302, 306, 107 भादवि और आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर चालान न्यायालय में पेश किया। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने मुख्य आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई, जबकि अन्य आरोपियों को पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर दोषमुक्त कर दिया गया। सुनवाई के दौरान इंजीनियर राजेश मिश्रा के वकील ने तर्क दिया कि मृतक से उनके पारिवारिक और मित्रवत संबंध थे, कोई विवाद नहीं था और कार ले जाना सामान्य बात थी। अदालत ने इन तथ्यों को स्वीकार करते हुए उन्हें बरी कर दिया। इस फैसले के बाद जहां मृतक परिवार को आंशिक न्याय मिलने की उम्मीद जगी है, वहीं शहर में यह मामला एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया है।