धसान नदी के बीचों बीच विराजे भगवान भोलेनाथ, इस मेले की महिमा है बड़ी निराली
धसान नदी के बीचों बीच विराजे भगवान भोलेनाथ, इस मेले की महिमा है बड़ी निराली
बुंदेलखंड में धसान नदी के बीचों बीच एक प्रसिद्ध मेला लगता है। जिसकी खास बात इसे यह बनाती है की चाहे नदी कितनी भी उफान पर क्यों न हो, चाहे बारिश कितनी भी भीषण क्यों न हो, भोलेनाथ की कृपा से यह मंदिर और यह मेला हमेशा सुरक्षित रहता है। यही कारण है की सिद्धन का यह स्थल आस्था का मजबूत केंद्र बन चुका है। हम बात कर रहे हैं। एमपी के छतरपुर जिले की, जहां ग्राम पंचायत भगवां से करीब छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित सिद्धन का मेला सालों से श्रद्धा, विश्वास और परंपरा का जीवंत प्रतीक बना हुआ है। हर साल की तरह इस साल भी मकर संक्रांति के मौके पर यहां एक दिवसीय मेले का आयोजन हुआ। मेले की सबसे बड़ी और अनोखी विशेषता यह है कि इसका आयोजन धसान नदी के ठीक बीचों-बीच किया जाता है। चारों ओर प्रवाहित होती नदी की धाराओं के बीच स्थापित भगवान शिव का विशाल और प्राचीन मंदिर है। जिससे श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास रहता है।
मकर संक्रांति पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। दूर-दराज के गांवों से महिलाएं, बुजुर्ग,युवा और बच्चे बड़ी संख्या में सिद्धत पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पहले धसान नदी में आस्था की डुबकी लगाई, फिर भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से पूरा क्षेत्र शिवमय हो उठा। यह मेला केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। बल्कि ग्रामीण संस्कृति और सामाजिक एकता का सशक्त उदाहरण भी है। मेले में पारंपरिक दुकानों,घरेलू उपयोग की वस्तुओं,खिलौनों और खान-पान के स्टॉलों ने ग्रामीण जीवन की सादगी और आत्मीयता को दर्शाया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक सिद्धन का यह मेला कई दशकों से लगातार आयोजित होता आ रहा है
धसान नदी के बीच स्थित शिव मंदिर को लेकर कई लोककथाएं और जनविश्वास प्रचलित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नदी में जब कभी तेज बहाव आता है। तब भी मंदिर को कोई क्षति नहीं पहुंचती। लोग इसे भगवान शिव की विशेष कृपा मानते हैं। मेले के दौरान शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन और ग्रामवासियों का सहयोग सराहनीय रहा।स्वयंसेवकों और ग्रामीणों ने मिलकर श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखा। जिससे मेला शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ