हर्षा रिछारिया का बड़ा बयान, बोलीं धर्म ने मुझे अपनाया, अब प्रचार से लूंगी विराम, मकर संक्रांति पर नर्मदा तट पर
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और महाकुंभ के दौरान चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया एमपी के जबलपुर के प्रसिद्ध ग्वारीघाट पहुंचीं। यहां उन्होंने मां नर्मदा में विधिवत स्नान कर पूजा-अर्चना की और सनातन धर्म को लेकर अपने मन की बात खुलकर रखी। नर्मदा तट पर हर्षा की मौजूदगी को लेकर श्रद्धालुओं और सोशल मीडिया पर खासा उत्साह देखने को मिला। नर्मदा स्नान के बाद मीडिया से बातचीत में हर्षा रिछारिया ने कहा, “सनातन धर्म कोई जबरदस्ती नहीं अपनाया जा सकता। मैंने धर्म नहीं अपनाया, बल्कि धर्म ने मुझे अपनाया है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वह सनातन धर्म के प्रचार से कुछ समय के लिए विराम लेंगी। हर्षा ने कहा कि बीते समय में धर्म को लेकर उन्होंने जो भी किया, वह पूरी श्रद्धा और विश्वास से किया, लेकिन अब आत्ममंथन का समय है।
हर्षा रिछारिया ने कुछ संतों और धर्मगुरुओं पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि “हमारे धर्म की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि बाहरी विरोध से पहले हमें अपने ही लोगों से लड़ना पड़ता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि एक संगठित तरीके से उनके खिलाफ माहौल बनाया गया और केवल इसलिए विरोध हुआ क्योंकि वह एक महिला हैं। भावुक होते हुए हर्षा ने कहा कि जब कोई लड़की आगे बढ़ती है तो उसके स्वाभिमान और चरित्र पर सवाल उठाए जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक साल में उन्हें कई मानसिक परीक्षाओं से गुजरना पड़ा। “मुझे मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन अब मैं और मजबूत हूं,”—यह कहते हुए उन्होंने विरोधियों पर गंभीर सवाल खड़े किए।
हर्षा ने कहा कि उनके खिलाफ कुछ संतों द्वारा आपसी सहमति बनाकर सहयोग न करने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि “मेरी गलती सिर्फ इतनी है कि मैं एक लड़की हूं और मुझे महादेव ने पहचान दी है।” हर्षा रिछारिया ने यह भी ऐलान किया कि वह 18 जनवरी को माघ मेला में स्नान करेंगी और “हर हर महादेव” के उद्घोष के साथ वहां उपस्थित होंगी। उनके इस बयान के बाद धार्मिक और सोशल मीडिया जगत में चर्चाएं तेज हो गई हैं।