बुंदेलखंड की मशहूर मिठाई घड़िया गुल्ला, धीरे-धीरे हो रही विलुप्त, कभी शान थी ये मिठाई |SAGAR TV NEWS|
बुंदेलखंड की एक बहुत मशहूर मिठाई घड़िया गुल्ला, जो प्राचीन, परंपरागत और पूर्वजों की देन है। कभी यह मिठाई इतनी प्रचलन में थी की दूल्हा -दुल्हन के लिए ससुराल ले जाना प्रथा में शामिल हो गयी थी। हालांकि मकर संक्रांति पर खास तौर से बनने वाली अब इस मिठाई का चलन काफी कम हो गया है। लेकिन कुछ लोग हैं जो अपने पूर्वजों की परंपरा को संभाले हुए हैं और इसे आज भी निभा रहे हैं। इसी तरह एमपी के दमोह में भी एक मिठाई दुकान है जहां घड़िया गुल्ला मिठाई आज भी बनाई जाती है।
दमोह शहर के हृदय स्थल कहे जाने वाले घंटाघर के पास मिठाई दुकान जो काफी लंबे अरसे से संचालित है। दुकानदार बताते हैं कि यह उनके पूर्वजों की देन है। पूर्वजों ने मिठाई बनाने का काम शुरू किया जिसे वह आगे बढ़ा रहे हैं। मिठाई को परंपरागत प्राचीन मिठाई के दर्जा प्राप्त है दुकानदार बताते हैं कि जब मावा जैसी मिठाई मिलना मुश्किल था। तब गुड़ और शक्कर की मिठाई का बहुत महत्व था। पूर्वजों ने मिठाई को आकर्षित आकार दिया। इसके बाद मिठाई की महत्वता भी बड़ी और इस मिठाई को दूल्हा-दुल्हन द्वारा ससुराल, मायके ले जाना भी महत्वपूर्ण प्रथा में शामिल हो गया। मकर संक्रांति पर यह मिठाई घड़ियां गुल्ला मिठाई के नाम से मशहूर है जिसमें शेर, हाथी, घोड़े चूड़ी कंगन समेत अन्य चीजों का आकार देकर इस मिठाई को मनमोहके और आकर्षित बनाया जाता है। जो आज भी देखने में सुंदर नजर आती है...
हालांकि बदलते परिवेश में आज इस मिठाई का महत्व पहले की अपेक्षा कम है। लेकिन गांव में मौजूद पूर्वजों की परंपरागत प्रथा के कारण आज भी इस मिठाई का गांव में महत्व माना जाता है। शहरों में ये ज्यादा प्रचलित नहीं है। दुकानदार के मुताबिक ग्रामीण अंचल के लोग आज भी मकर संक्रांति के पर्व पर आते हैं और यह मिठाई खरीदते हैं। अब यह व्यवसाय धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। पहले कई लोग ये व्यवसाय करते थे। लेकिन अब तकरीबन 8 से 10 दुकानदार ही ये काम कर रहे है।-