कलेक्टर का मानवीय चेहरा, रात में सड़कों पर निकले और गरीबों,ज़रूरतमंदों को बांटे कम्बल
इन दिनों जबरदस्त ठंड पड़ रही है। कहीं आलम ये है कि धूप नहीं निकल रही तो कहीं पारा लुढ़कने से कुल्फी जमा देने वाली ठंड पड़ रही है। ऐसे में सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब और असहाय लोग हो रहे हैं। जिनका सहारा खुद कलेक्टर बने, जहां आधी रात में वह खुद सड़कों पर निकले और भीषण ठंड में असहाय, मजदूरों की मदद करते हुए उन्हें कंबल बांटे। छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने जिला अस्पताल पहुंचकर कंबल बांटे।
देखा जाए तो पूरा बुंदेलखंड अंचल इन दिनों कड़ाके की ठंड की चपेट में है। सुबह से शाम तक लोग अलाव और आग के सहारे ठिठुरती ठंड से बचने की कोशिश कर रहे हैं। छतरपुर जिले में भी ठंड ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है। सबसे ज्यादा परेशानी गरीब, मजदूर और बेघर मजबूर लोगों को उठानी पड़ रही है। जो खुले आसमान, कच्चे मकानों, रैन बसेरों या सड़क किनारे रात गुजारने को मजबूर हैं।
इन्हीं हालातों को देखते हुए छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल का मानवीय चेहरा सामने आया। कलेक्टर ने आधी रात अपनी कार में कंबल लदवाए और खुद ही शहर के अलग-अलग इलाकों में निकल पड़े। सड़कों, बस स्टैंड, रैन बसेरों और जिला अस्पताल के आसपास ठंड से कांप रहे गरीब और बेबस लोगों को कंबल वितरित कर उन्हें राहत पहुंचाई।
कलेक्टर आधी रात जिला अस्पताल भी पहुंचे। जहां खुले में या बरामदों में ठंड से जूझ रहे मरीजों के परिजनों और जरूरतमंदों को कंबल बांटे। इस दौरान उन्होंने अस्पताल परिसर में व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया और ठंड से बचाव के लिए जरूरी इंतजाम करने के निर्देश भी दिए। इस दौरान उन्होंने रैन बसेरों की व्यवस्था बढ़ाने के संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहर और ग्रामीण इलाकों में रैन बसेरों की संख्या बढ़ाई जाए साथ ही प्रमुख चौराहों, बस स्टैंड और सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था और मजबूत की जाए। ताकि कोई भी व्यक्ति ठंड के कारण परेशानी में न रहे।--------