दूषित पानी से मौ-तों पर सरकार सख्त, एसीएस नीरज मंडलोई अनुपम राजन ने संभाला मोर्चा,
एमपी के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से गई जानों के बाद मध्यप्रदेश सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासनिक स्तर पर त्वरित और निर्णायक कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री के निजी सचिव एवं अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई और नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने मौके पर पहुंचकर हालात की गहन समीक्षा की और जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। घटना के बाद से ही सरकार ने साफ कर दिया है कि नागरिकों की जान से खिलवाड़ करने वाली किसी भी लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इंदौर पहुंचे दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने सबसे पहले उस स्थान का निरीक्षण किया, जहां पाइपलाइन में लीकेज के कारण दूषित पानी की आपूर्ति की आशंका सामने आई थी। अधिकारियों ने मौके पर तकनीकी टीम से जानकारी ली और सुधार कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन किया।
इसके बाद एसीएस अनुपम राजन और नीरज मंडलोई ने कलेक्टर शिवम वर्मा और नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के साथ स्वास्थ्य केंद्र और संजीवनी क्लिनिक का दौरा किया। यहां उन्होंने भर्ती मरीजों से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य की स्थिति जानी। अनुपम राजन ने बताया कि सरकार की त्वरित कार्रवाई के चलते हालात तेजी से नियंत्रण में आ रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और संजीवनी क्लिनिक में 24 घंटे मेडिकल टीम तैनात की गई है, जिससे मरीजों को तत्काल उपचार मिल रहा है। गंभीर मामलों की संख्या में लगातार कमी दर्ज की जा रही है और ओपीडी भी सामान्य स्तर की ओर लौट रही है।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने घर-घर जाकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और समस्या की जड़ तक पहुंचने का प्रयास किया। जल वितरण व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करने के लिए युद्धस्तर पर काम जारी है। जहां-जहां पाइपलाइन लीकेज या गंदे पानी के रिसाव की आशंका थी, वहां तत्काल मरम्मत कराई गई है। संदिग्ध बोरवेल को सील किया गया है और नई पाइपलाइन बिछाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेशभर में “शुद्ध पेयजल अभियान” शुरू किया गया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसके लिए किसी भी स्तर पर कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।