BSNL ठेकेदार की घोर लापरवाही बनी मौत की वजह, बिना बैरिकेड खोदे गड्ढे में गिरकर किसान की मौत
एमपी के उज्जैन जिले के उन्हेल थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां बीएसएनएल ठेकेदार की भारी लापरवाही ने एक मेहनतकश किसान की जान ले ली। पाइपलाइन बिछाने के नाम पर बिना किसी सुरक्षा और बैरिकेड के खोदे गए गड्ढे में गिरकर किसान की गई जान , जिसने प्रशासन और ठेकेदार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह पूरा मामला खाचरोद तहसील के ग्राम नागझिरी का है।
यहां बीते कई दिनों से बीएसएनएल द्वारा पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने सड़क किनारे और रास्तों पर गहरे गड्ढे खोद दिए, लेकिन न तो बैरिकेड लगाए गए और न ही कोई चेतावनी बोर्ड। ग्रामीणों ने कई बार ठेकेदार को इस लापरवाही की सूचना दी, लेकिन उसने कोई ध्यान नहीं दिया।
बीती शाम लगभग सात बजे किसान रमेश पिता घासी उम्र लगभग 50 वर्ष अपने साले और एक अन्य व्यक्ति के साथ मटर की फसल बेचकर उन्हेल मंडी से गांव लौट रहे थे। अंधेरा होने के कारण उन्हें रास्ते में खोदा गया गड्ढा दिखाई नहीं दिया और उनकी बाइक सीधे गड्ढे में जा गिरी।
हादसे में रमेश गंभीर रूप से घायल हो गए। ग्रामीणों की मदद से उन्हें नागदा के जनसेवा अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर उज्जैन रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही रमेश ने दम तोड़ दिया। इस हादसे के बाद परिजन और ग्रामीण गुस्से में उन्हेल थाने पहुंचे और ठेकेदार पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कराने की मांग की।
परिजनों का आरोप है कि ठेकेदार की राजनीतिक पहुंच और पैसों के दम पर शुरुआत में मामला दर्ज नहीं किया गया। जब मीडिया ने हस्तक्षेप किया और परिवार के साथ थाने पहुंची, तब जाकर एफआईआर दर्ज हुई और पटवारी द्वारा मौके का पंचनामा बनाया गया। इतना ही नहीं, ठेकेदार ने मीडिया को गुमराह करने की कोशिश करते हुए कहा कि गड्ढा किसानों द्वारा खोदा गया है, लेकिन गांव पहुंचकर मीडिया ने सच्चाई उजागर की।
ग्रामीणों ने बताया कि हादसे के बाद कई गड्ढों को जल्दबाजी में भर दिया गया। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इससे पहले एक अन्य किसान भी इसी गड्ढे में गिरकर अपना हाथ गंवा चुका था, लेकिन तब भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि मृतक किसान को न्याय नहीं मिला तो वे उग्र आंदोलन और चक्का जाम करेंगे। सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई करेगा या फिर एक और किसान की मौत फाइलों में दबकर रह जाएगी।