इन दिनों एमपी के सागर संभाग के दमोह नगर में नगर पालिका प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाओ अभियान तेज़ी से चलाया जा रहा है, लेकिन इस कार्रवाई को लेकर अब सवाल भी उठने लगे हैं। शहर के कई हिस्सों में मकान और दुकानें तोड़ी जा रही हैं, तो वहीं दूसरी ओर कुछ स्थानों पर कथित साठगांठ के चलते अतिक्रमण जस का तस बना हुआ है। इसी को लेकर स्थानीय लोगों में खासा आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि यह अतिक्रमण अभियान पूरी तरह निष्पक्ष नहीं है। कहीं सिर्फ “मुंह दिखाई” के नाम पर आधे-अधूरे अतिक्रमण हटाए जा रहे हैं, तो कहीं प्रभावशाली लोगों के अवैध निर्माणों को जानबूझकर छोड़ा जा रहा है। इससे आम जनता में यह धारणा बन रही है कि कार्रवाई दोहरी नीति के तहत की जा रही है।
यह पहला मौका नहीं है जब नगर पालिका प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ कदम उठाया हो। इससे पहले भी ऐसे अभियान चलाए गए थे, लेकिन कुछ समय बाद हालात फिर से जस के तस हो गए। अब एक बार फिर बीते तीन-चार दिनों से कार्रवाई शुरू हुई है, जिससे लोगों को उम्मीद तो जगी है, लेकिन भरोसा अब भी अधूरा है। इस पूरे मामले पर नगर पालिका सीएमओ राजेंद्र सिंह लोधी का कहना है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान 15 तारीख तक लगातार चलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाले-नालियों के ऊपर स्थायी रूप से बने अवैध अतिक्रमण को प्राथमिकता से हटाया जा रहा है। सीएमओ ने दोहरी कार्रवाई के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नगर पालिका प्रशासन शहर के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार कार्रवाई कर रहा है और आगे भी यह अभियान जारी रहेगा।
नगर पालिका द्वारा अब तक कचौरा शॉपिंग सेंटर, पठानी मोहल्ला और इंदिरा मार्केट जैसे क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाया गया है। हालांकि शहर के कुछ ऐसे इलाके अभी भी बचे हुए हैं, जहां आए दिन यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाती है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इन संवेदनशील क्षेत्रों पर प्रशासन का ध्यान नहीं जा रहा है। फिलहाल इस कार्रवाई ने एक बार फिर लोगों के मन में उम्मीद जगाई है। अब देखना यह होगा कि यह अभियान वास्तव में शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाता है या फिर हमेशा की तरह इसका बोझ गरीब और आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर ही पड़ता है।